माई कहे .. मातृ दिवस पर वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर मिश्रा की भोजपुरी कविता

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माई कहे ..

माई कहे ..कि
ए बाबू, जवना के तू घर कहेलs,
उ घर ना नू ह हो, उ फ्लैट हवे।

घर में त आँगना होला,
दलान होला,
बैठक अउर दुआर होला।
आँगना में हैंडपम्प,
अउरी दुअरा पर अमरूद के पड़े होला,
घर के बगल में सब्जी – फरहरी वाला कोला होला,
नेमुआ होला, पपीता होला
अउर आम के पेड़ पर टिकोरा होला।

ये सुनें- भोजपुरी के वरिष्ठ गीतकार कुमार अजय सिंह की मदर्स स्पेशल गीत

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नाँद में सानी-पानी खात गाय,
सांझ- सबेरे, दूध देले..
ओकर दुधवा केतना मीठ होला..।

ए बाबू, सुन$ ..
ई जवन पाकेट वाला दूधवा तहन लोग पिये ल ..
उ दूध जइसन लागे ला जरूर,
लेकिन ओइसन कहाँ होला?

ए बाबू,
आ हई जवन अपना फ्लैटवा के बगल वाला फ्लैट में रहे वाला लोग के तू पड़ोसी कहेल,
पड़ोसी अइसन कहाँ होला?

गोतिया- पड़ोसी के त हर बात पता होला,
सुख -दुःख, निमन- बाउर सब में लोग साथ साथ होला,
कबो कबो झगड़ा, अउर रार होला।

ये भी पढ़ें- भोजपुरी सिनेमा के ‘अमरीश पुरी’ के बारे में आप कितना जानते हैं?

ए बाबू, सुनs ..
हई बाउंडरी के भीतर के कुछ फ्लैटवा के
जवन तू सोसाइटी कहेल ..
समाज अइसन कहाँ होला?

सही कह तs,
सोसाइटी अउर समाज त गांवे में होला!
जँहवां, हर गाँव में कई कई गो टोला होला!

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