झारखंड

तुलु को आधिकारिक दर्जा और भोजपुरी की उपेक्षा

डॉ. संतोष पटेल, भोजपुरी अध्येता भारत विविधताओं का देश है, जहाँ हर सौ किलोमीटर पर भाषा और बोली का रंग बदल जाता है। भारतीय संविधान...

भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में जगह देने से हिंदी कैसे कमजोर होगी?

लेखक: डॉ. संतोष पटेल, संपादक ‘भोजपुरी ज़िंदगी’, दिल्ली भोजपुरी को ‘बोली’ तक सीमित करना उसके करोड़ों भाषियों और समृद्ध साहित्य के साथ अन्याय  कल परसो से...

भोजपुरी का ‘दुगोला’ जब गीत बन जाता है सवाल और सुरों में मिलता है जवाब

भोजपुरी24 विशेष | लोकसंगीत एवं लोकसंस्कृति भोजपुरी लोकसंगीत की दुनिया में ‘दुगोला’ सिर्फ दो गायकों के बीच गाने की प्रतियोगिता नहीं है। यह ऐसी लोकपरंपरा...

भोजपुरी कविता की विकास यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज है ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’

समीक्षक- राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य के इतिहास पर गंभीर और शोधपरक कार्य अपेक्षाकृत कम हुए हैं। ऐसे समय में ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’ जैसी...

सवाल बा भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता अब ले काहे ना ? दोषी के ?

कनक किशोर, राँची ( झारखंड ) जन कवि विजेंद्र अनिल के एगो कविता के लाइन ह- 'लाली हम भोर के, गीत हम अंजोर के'। जन...

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