झारखंड

सतुआ की कहानी, भोजपुरी-बिहारी संस्कृति का इंस्टेंट सुपरफूड

नई दिल्ली/पटना: सत्तू, जिसे भोजपुरी भाषा में ‘सतुआ’ या ‘सतवा’ कहा जाता है, यह चने-जौ का एक साधारण आटा ही नहीं है बल्कि बिहार,...

भोजपुरी के पहले अंग्रेज विद्वान थे जॉर्ज अब्राहम ग्रीअरसन

पटना/गोरखपुर: 19वीं शताब्दी के अंत में पटना के एक अंग्रेज मजिस्ट्रेट ने भोजपुरी बोलना सीख लिया। वे न सिर्फ बोलते थे, बल्कि लोकगीत संकलित...

भोजपुरी की विदेशों तक की यात्रा, गिरमिटिया से गल्फ तक की अमर कहानी

पटना/गोरखपुर: कलकत्ता पोर्ट से 1838 में पहली जहाज़ 'अटलांटिक' रवाना हुई। उस पर सैकड़ों भोजपुरी बोलने वाले मजदूर सवार थे पूर्वी उत्तर प्रदेश और...

लिट्टी-चोखा की कहानी: चंद्रगुप्त मौर्य के सैनिक युद्ध में साथ रखते थे लिट्टी

नई दिल्ली/पटना: गोइठा की धीमी आंच पर सेंकी लिट्टी, उसमें भरा सत्तू का मसालेदार भराव, और साथ में आग पर भुने बैंगन-आलू-टमाटर का...

भोजपुरी की ‘खोई हुई’ लिखावट थी कैथी और फिर धीरे धीरे मर गई

पटना/गोरखपुर: कल्पना कीजिए, 19वीं सदी का बिहार का कोई जिला या पूर्वांचल हो। सरकारी दफ्तरों में, अदालतों में, किसानों के खेत-खलिहान के रिकॉर्ड में,...

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