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भोजपुरी के संवेदनशील साहित्यकार चंद्रेश्वर, गाँव, समाज और मनुष्यता के कवि

भोजपुरी धुरंधर- चंद्रेश्वर, गाँव, समाज और मनुष्यता की आवाज़ भोजपुरी साहित्य में कुछ ऐसे रचनाकार हैं जिनकी लेखनी केवल शब्दों का संसार नहीं रचती, बल्कि...

जिनसे कहा गया था, ‘बेटी के पढ़ावल और बढ़ावल ठीक ना होला’, वही आज भोजपुरी की पहचान बन गईं

भोजपुरी धुरंधर: अश्लीलता के दौर में लोकसंस्कृति की मशाल बनीं मनीषा श्रीवास्तव, 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार-2025' से सम्मानित किए जाने की घोषणा की...

भोजपुरी माटी के लाल अखिलेन्द्र मिश्र को मिला पंडित माधवलाल चतुर्वेदी पुरस्कार

‘लगान’ और ‘सरफरोश’ के अभिनेता की पुस्तक हुई सम्मानित पटना/भोपाल। भोजपुरी भाषी समाज और बिहार के लिए गर्व की बात है कि वरिष्ठ अभिनेता, रंगकर्मी,...

भोजपुरी गाने में एआई का दौर, अरविंद अकेला कल्लू का नया सांस्कृतिक संदेश

वाराणसी। भोजपुरी सिनेमा और संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके युवा स्टार अरविंद अकेला 'कल्लू' एक बार फिर चर्चा में हैं।...

रामनाथ पांडेय: वह साहित्यकार जिसने भोजपुरी को पहला उपन्यास दिया और साहित्यिक आंदोलन खड़ा कर दिया

जयंती विशेष | 8 जून 1924 – 16 जून 2006 यदि भोजपुरी साहित्य के इतिहास को एक विशाल वृक्ष माना जाए, तो उसकी जड़ों में...

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