भोजपुरी माटी के लाल अखिलेन्द्र मिश्र को मिला पंडित माधवलाल चतुर्वेदी पुरस्कार

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‘लगान’ और ‘सरफरोश’ के अभिनेता की पुस्तक हुई सम्मानित

पटना/भोपाल। भोजपुरी भाषी समाज और बिहार के लिए गर्व की बात है कि वरिष्ठ अभिनेता, रंगकर्मी, लेखक और चिंतक अखिलेन्द्र मिश्र को उनकी चर्चित पुस्तक ‘अभिनय, अभिनेता और अध्यात्म’ के लिए वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित ‘पंडित माधवलाल चतुर्वेदी पुरस्कार’ प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश (भोपाल) द्वारा दिया जा रहा है। अखिलेन्द्र मिश्र भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक चिंतन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। बिहार के सिवान जिले में जन्मे मिश्र ने छपरा जिला स्कूल और राजेंद्र कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले अखिलेन्द्र का रुझान बचपन से ही रंगमंच की ओर था और उन्होंने अपने अभिनय जीवन की शुरुआत भोजपुरी नाटक ‘गौना की रात’ से की थी। बाद में उन्होंने आईपीटीए (IPTA) और एकजुट थिएटर ग्रुप के साथ अभिनय की बारीकियां सीखीं।

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देशभर में उन्हें दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक ‘चंद्रकांता’ के क्रूर सिंह के किरदार से जबरदस्त पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने फिल्म ‘सरफरोश’ में मिर्ची सेठ, ऑस्कर नामांकित फिल्म ‘लगान’ में अर्जन तथा टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ में रावण जैसे यादगार किरदार निभाए हैं। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने फिल्मों, टेलीविजन और रंगमंच पर अपनी प्रतिभा का प्रभाव छोड़ा है।

साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित की जा रही उनकी पुस्तक ‘अभिनय, अभिनेता और अध्यात्म’ अभिनय कला को केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं मानती, बल्कि उसे आत्मविकास और आध्यात्मिक साधना से जोड़कर देखती है। पुस्तक में कलाकार के व्यक्तित्व निर्माण, मानसिक अनुशासन, संवेदनशीलता और भारतीय अध्यात्म के बीच संबंधों का गहन विश्लेषण किया गया है। यही कारण है कि इसे रंगकर्मियों, अभिनय के विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष सराहना मिली है।

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भोजपुरी संस्कृति की परंपरा हमेशा से लोकजीवन, कला और अध्यात्म के समन्वय की रही है। भिखारी ठाकुर, महेंद्र मिसिर और कबीर की विरासत वाले इस सांस्कृतिक भूगोल से निकले अखिलेन्द्र मिश्र को मिला यह सम्मान भोजपुरी समाज की रचनात्मक और बौद्धिक परंपरा का भी सम्मान माना जा रहा है। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश द्वारा पुरस्कार की घोषणा के बाद साहित्य, रंगमंच और फिल्म जगत से जुड़े अनेक लोगों ने उन्हें बधाई दी है। सांस्कृतिक जगत के जानकारों का मानना है कि मनोरंजन के व्यावसायिक दौर में अभिनय को भारतीय दर्शन और अध्यात्म से जोड़ने वाली कृति का सम्मानित होना सकारात्मक और प्रेरणादायक संकेत है।

भारतीय मनोरंजन जगत के हस्ताक्षर हैं अखिलेन्द्र मिश्र

अखिलेन्द्र मिश्र का अभिनय सफर भारतीय मनोरंजन जगत में बेहद समृद्ध और विविधतापूर्ण रहा है। उन्होंने ‘लगान’, ‘सरफरोश’, ‘गंगाजल’, ‘अपहरण’, ‘हलचल’, ‘रेडी’, ‘वीर-ज़ारा’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’, ‘फिज़ा’, ‘कंपनी’ और ‘कौन’ जैसी चर्चित फिल्मों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। टेलीविजन पर ‘चंद्रकांता’ के क्रूर सिंह के अलावा ‘ये प्यार न होगा कम’, ‘उतरन’, ‘दीया और बाती हम’, ‘महाभारत’ तथा ‘रामायण’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। अभिनय के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें विभिन्न सांस्कृतिक और रंगमंचीय संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया है।

अब साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश द्वारा प्रदान किया जा रहा ‘पंडित माधवलाल चतुर्वेदी पुरस्कार’ उनके बहुआयामी व्यक्तित्व में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ रहा है। अभिनेता, लेखक, चिंतक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व के रूप में उनकी यह पहचान भोजपुरी समाज के लिए विशेष गर्व का विषय है। भोजपुरी24 डॉट कॉम परिवार की ओर से अखिलेन्द्र मिश्र को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। यह सम्मान न केवल एक कलाकार की उपलब्धि है, बल्कि भोजपुरी अंचल की सांस्कृतिक चेतना और रचनात्मक विरासत की भी बड़ी पहचान है।

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