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Exclusive articles:

‘बार के दीअरी दहा दिहिला’, भोजपुरी गजल आ गीत में माटी के महक के अनमोल संग्रह

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया भोजपुरी साहित्य में गजल आ गीत के परंपरा के समृद्ध करे वाला डॉ. उदय प्रताप हयात के पहिला भोजपुरी गजल-गीत संग्रह 'बार...

भोजपुरी में का बा? भाग-1

डॉ. संतोष पटेल भोजपुरी साहित्य में कुछ काम अइसन भइल बा, जवन होखे वाला घटना से पहिलहीं सोच लिहल गइल बा। सुरेश कांटक जी भोजपुरी...

‘फगुआ के पहरा’ भोजपुरी कविता में लोकसंवेदना और प्रयोग का विस्तार

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी साहित्य में ऐसी कृतियों का विशेष महत्त्व है, जिनमें लोकजीवन की सहजता के साथ समय और समाज की...

‘भोजपुरिया बवाल’ और भोजपुरी की छवि, नाम-भाषा और पहचान पर उठे सवाल

विनोद अनुपम, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक बिहार के मुख्यमंत्री किसी भी मंच पर आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं। किसी कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति तय करने के...

भाषा, बाज़ार और अश्लीलता: भोजपुरी ही क्यों गुनहगार?

संतोष पटेल आधुनिक जनसंचार माध्यमों, सोशल मीडिया और डिजिटल एल्गोरिदम के इस युग में किसी संस्कृति या भाषा को बहुत जल्दी किसी एक कटघरे में...

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‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

‘ककहरा’ भोजपुरी काव्य की समकालीन समझ का सार्थक प्रयास

समीक्षक: डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी अपनी वाचिक परंपरा, लोकधर्मी...

‘बार के दीअरी दहा दिहिला’, भोजपुरी गजल आ गीत में माटी के महक के अनमोल संग्रह

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया भोजपुरी साहित्य में गजल आ गीत के...
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