धर्म, रीति-रिवाज

2000 साल पुराना है भोजपुरी क्षेत्रों में आम-महुआ का विवाह, परंपरा में छिपा प्रकृति और संबंधों का विज्ञान

भोजपुरी अंचल में शादी से पहले आम और महुआ के पेड़ों का विवाह कराने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो इस बात का प्रमाण...

गोबर के कैनवास पर उकेरी गई बहनों के प्रेम और लोक-संस्कृति की जीवंत कला है पिड़िया

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी अंचल की मिट्टी में जितनी गहराई है, उतनी ही उसकी परंपराओं में आत्मीयता और सौंदर्य भी समाया हुआ है। इन्हीं परंपराओं में...

सतुआन: परंपरा, प्रकृति और स्वास्थ्य का लोकपर्व

सतुआन आज, पूर्वांचाल, बिहार, झारखण्ड, नेपाल, मॉरीशस, फिजी में भी मनाया जा रहा है पटना/ गोरखपुर: सतुआन, जिसे सतुआनी या सत्तूआन भी कहा जाता है,...

परंपरा, पीड़ा और प्रेम की स्वर-यात्रा है कजरी

  विद्या निवास पांडेय बताते हैं कि कजरी के तीन रूप हैं शास्त्रीय, लोक और मॉर्डर्न वाराणसी : भोजपुरी लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा में कजरी एक...

पूर्वांचल भोजपुरी बिरहा सम्मेलन का रंगारंग आगाज

देवरिया: खुखुंदू क्षेत्र में 28वें दो दिवसीय पूर्वांचल भोजपुरी बिरहा सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार शाम भव्य तरीके से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत देवी गीत...

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