गांव समाज

भोजपुरी गीत-संगीत का संकट या बदलाव? अश्लील बनाम श्लील की नई बहस

डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह भोजपुरी की गीत परंपरा में प्रतिरोध, राग-विराग, संयोग-वियोग, संस्कार और जन सरोकारों की चेतना प्रवाहित होती रही है। वहीं इक्कीसवीं सदी...

मॉरीशस में भोजपुरी का गला किसने घोंटा?

-डॉ.संतोष पटेल मॉरीशस में एक प्रचलित गीत है- 'अंगाजे रहल भईया, अंगाजे रहल भइया एक महिनवा में पांच गो रुपइया हो खाये के मोटका चाउर रहल खूबे लाल कोको...

1728 की ‘बारह मासी’ से शुरू हुई थी भोजपुरी साहित्य की शुरुआती लिखित परंपरा

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी भाषा का साहित्यिक इतिहास अत्यंत समृद्ध और पुराना माना जाता है, लेकिन इसका लिखित रूप लंबे समय तक लोकगीतों, मौखिक परंपराओं और जनजीवन...

मां की दीवारों से शुरू हुआ सपना, जिसने भोजपुरी लोककला ‘पिड़िया’ को दिलाई वैश्विक पहचान

Bhojpuri24.com की विशेष ‘भोजपुरी धुरंधर’ श्रृंखला में आज पढ़िए पिड़िया लेखन की प्रतिष्ठित लोकचित्रकार विनीता कुमारी की प्रेरक कहानी। हाल ही में भोजपुर की...

भोजपुरी के नाम पर फैल रहे फूहड़पन के विरुद्ध छेड़ा अभियान है ‘लोकरंग’

अंतरराष्ट्रीय फलक पर लोकरंग की खुशबू, इसमें अब तक 1800 से अधिक लोक कलाकारों ने भाग लिया है तो गांव की महिलाओं ने परंपरागत...

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