साहित्य

‘फगुआ के पहरा’ भोजपुरी कविता में लोकसंवेदना और प्रयोग का विस्तार

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी साहित्य में ऐसी कृतियों का विशेष महत्त्व है, जिनमें लोकजीवन की सहजता के साथ समय और समाज की...

भोजपुरी में डायस्पोरा स्टडीज का पहला नाटक : ‘गिरमिटिया भारतवंशी’

समीक्षक: डॉ. संतोष पटेल सन् 1980 के बाद ‘डायस्पोरा’ (Diaspora) शब्द शिक्षा, साहित्य और सार्वजनिक विमर्श के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में...

खाली किताब ना हऽ, छँनत मन के अंजोर हऽ ‘पढ़त-लिखत’

समीक्षक: निलय उपाध्याय आज सुनील कुमार पाठक जी से मुलाकात हुई और सुबह सुंदर हो गई। उनकी किताब मिली। किताब भोजपुरी में है और इसका...

‘गंगा रतन बिदेसी’ भोजपुरी उपन्यास में प्रवासी जीवन की पीड़ा

समीक्षक: प्रकाश प्रियांशु भोजपुरी साहित्य धारा में उपन्यास विधा अपेक्षाकृत नई है, लेकिन इसमें जीवन के गहरे अनुभवों को प्रस्तुत करने की क्षमता अद्भुत रही...

‘भोजपुरी के मान्यता देईं, ए सरकार’ : भाषा-अस्मिता, लोकचेतना और जनआंदोलन का काव्यात्मक दस्तावेज

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी की मान्यता की मांग को कविता का जनस्वर बनाता संग्रह भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता का सवाल केवल भाषा...

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