साहित्य

कुमार अजय सिंह की शानदार कविता का आनंद लें

चईत बुझात कहां बा ।। चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा, बनिहार से कटनी, कटात कहां बा। शहरन में लोगवा लहर लूटत बा, गांवन में अब केहू जात...

परंपरा, पीड़ा और प्रेम की स्वर-यात्रा है कजरी

  विद्या निवास पांडेय बताते हैं कि कजरी के तीन रूप हैं शास्त्रीय, लोक और मॉर्डर्न वाराणसी : भोजपुरी लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा में कजरी एक...

गांव की आवाज नहीं, बल्कि ग्लोबल बीट हो रहा है भोजपुरी म्यूजिक

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी संगीत, जो कभी सिर्फ खेत-खलिहानों, पर्व-त्योहारों और पारंपरिक लोकधुनों तक सीमित माना जाता था, आज एक बड़े सांस्कृतिक बदलाव के दौर से...

भोजपुरी लोक संस्कृति का रंगीन और जोशीला रूप है फरुवाही नाच 

गोरखपुर: भोजपुरी क्षेत्र की लोक संस्कृति बेहद समृद्ध और विविध है। गीत, संगीत, नृत्य और नाटकीय परंपराओं से भरी यह संस्कृति ग्रामीण जीवन की...

ऐसी भोजपुरी फिल्म जिसने बॉलीवुड को भी पीछे छोड़ दिया था

अमिताभ बच्चन-हेमा मालिनी की ‘गंगा’ पटना/मुंबई: भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी रही हैं, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं किया, बल्कि पूरी इंडस्ट्री...

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