बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भोजपुरी भाषा और संस्कृति की महत्ता पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने सभा को भोजपुरी में सम्बोधित करते हुए कहा कि भोजपुरी केवल एक बोली नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत की वाहक है।
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हरिवंश ने कहा कि भोजपुरी भाषा ने देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में भारतीय संस्कृति को पहचान दिलाई है। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देशों में आज भी भोजपुरी लोकगीत, परंपराएं और सांस्कृतिक मूल्य जीवंत हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा पर गर्व करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
शिव महापुराण कथा के विशाल आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कथा के दौरान आध्यात्मिक वातावरण के साथ-साथ भोजपुरी भाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भोजपुरी के विकास और उसके वैश्विक विस्तार को लेकर अपने विचार साझा किए।
हरिवंश ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है। यदि हम अपनी भाषा को बचाए रखेंगे तो हमारी सांस्कृतिक जड़ें भी मजबूत रहेंगी। उन्होंने भोजपुरी साहित्य, लोकगीत और लोककलाओं के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
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बलिया की पावन धरती पर आयोजित यह शिव महापुराण कथा इन दिनों श्रद्धा, अध्यात्म और सांस्कृतिक जागरूकता का केंद्र बनी हुई है, जहां धार्मिक संदेशों के साथ भोजपुरी अस्मिता की भी गूंज सुनाई दे रही है।

