फिल्म और मनोरंजन

भोजपुरी सिनेमा की सबसे बड़ी समस्या उसकी ‘गंदी इमेज’

मुंबई/पटना: भोजपुरी सिनेमा कभी अपनी सादगी, लोकजीवन और पारिवारिक मूल्यों के लिए जाना जाता था। गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो (1963) जैसी फिल्मों ने...

भोजपुरी कोई हाशिए की भाषा नहीं, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और गहरी परंपरा वाली भाषा:ओरसिनी

फ्रांसेस्का ओरसिनी, जब लंदन से गूंजे भोजपुरी के बोल लंदन/गोरखपुर: भोजपुरी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि भावना है, माटी की खुशबू, लोकगीतों की मिठास और...

जुग जुग जियो ललनवा… सोहर

पटना: अंधेरी रात में अचानक एक नन्ही किलकारी गूंज उठती है। जच्चा की थकान भरी आँखों में खुशी की चमक आ जाती है। घर...

त्रेता युग से जुड़ा है चैता के तार

नई दिल्ली/पटना: भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में चैता (या चइता/चैती) सिर्फ एक मौसमी गीत नहीं बल्कि यह चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) की बसंत ऋतु, राम नवमी,...

भोजपुरी सिनेमा, लोक की आवाज से स्टारडम तक की यात्रा

नई दिल्ली/पटना: भोजपुरी सिनेमा भारतीय सिनेमा की उस शाखा का नाम है जो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की मिट्टी, भाषा और संस्कृति को...

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