समाचार

डॉ. जौहर साफियाबादी के भोजपुरी उपन्यास ‘पूर्वी के धाह’, एक गंभीर, विस्तृत एवं आलोचनात्मक समीक्षा

कृष्ण कुमार भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा में कुछ ऐसी कृतियाँ समय-समय पर सामने आती हैं, जो केवल साहित्यिक सृजन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि...

भोजपुरी लोक की वह बात, जो रहीम भी जानते थे और दोहे में कह गए

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी भोजपुरी साहित्य की असल शक्ति या ताकत या विशिष्टता क्या है? उसकी लोक-स्मृति। उसकी जड़ें लोक जीवन में हैं, जो पीढ़ियों...

भोजपुरी सिनेमा को अश्लीलता के चश्मे से देखना गलत-मोनालिसा

बोलीं- कुछ वायरल गानों से नहीं तय होती भोजपुरी फिल्मों की पहचान, अच्छे कलाकार भी कर रहे हैं बेहतरीन काम, पूरी इंडस्ट्री को बदनाम न...

‘डुबि गइल गाँव-घर-बधार…’ बाढ़ की त्रासदी और किसान के दर्द का मर्मस्पर्शी दस्तावेज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व पत्रकार दिनेश्वर प्रसाद सिंह ‘दिनेश’ द्वारा रचित गीत ‘डुबि गइल गाँव-घर-बधार’ बाढ़ की विभीषिका और उससे तबाह होते...

लोक-संस्कृति की अमर धरोहर, जनवादी कविराज-गीतकार शैलेंद्र

 डॉ. संतोष पटेल जन्मदिन विशेष: शैलेंद्र ने भारत की पहली भोजपुरी फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' (रिलीज वर्ष 1963) के सभी प्रसिद्ध गाने लिखे।...

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