पत्रकारिता में करीब 20 वर्षों का अनुभव है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। भोजपुरी संस्कृति, भाषा, खानपान, पहनावे और लोकगीतों के संरक्षण व संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।
मुक्तक
भोजपुरिया अब बोल रहल, माटी ह अनमोल
जहाँ गूँजल बा राजेन्द्र आ जयप्रकाश के बोल
कुंवर के धरती,बुद्ध,गांधी के इहे देखवलस राह
ई धरती पर पैदा भइले,...
भोजपुरी के पहले ऑर्केस्ट्रा बैंड के शिल्पी मोहम्मद खलील, जिनकी आवाज में बसती थी लोकमाटी की खुशबू
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Bhojpuri24.com की ‘भोजपुरी पुरोधा’ श्रृंखला में आज प्रस्तुत हैं भोजपुरी भाषा के ऐसे महान मनीषी, जिन्होंने अपनी वैज्ञानिक दृष्टि, शोध और समर्पण से भोजपुरी...