बाबा भोजपुरिया

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पत्रकारिता में करीब 20 वर्षों का अनुभव है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। भोजपुरी संस्कृति, भाषा, खानपान, पहनावे और लोकगीतों के संरक्षण व संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।

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‘मालिक बहुत मानते हैं’, भोजपुरी की दुर्दशा पर मनोज भावुक का करारा व्यंग्य

भोजपुरी को हेय दृष्टि से देखने वालों पर व्यंग्य के जरिए उठाई आवाज, भाषा और संस्कृति के सम्मान का संदेश भोजपुरी भाषा और संस्कृति को...

भोजपुरी बोलना शर्म नहीं, गर्व की बात है

भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं होती, वह किसी समाज की आत्मा होती है। जिस भाषा में मां की लोरी सुनाई देती है, दादी-नानी...

भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में मिले स्थान, तो बदल सकती है करोड़ों लोगों की तकदीर

भाषा को मिलेगा सम्मान, युवाओं को अवसर और दुनिया में बढ़ेगी भोजपुरी की पहचान भारत की भाषाई विविधता उसकी सबसे बड़ी सांस्कृतिक ताकत है। देश...

भोजपुरी की लड़ाई को सिर्फ सांस्कृतिक आंदोलन नहीं, अब राजनीतिक एजेंडा बनने की जरूरत

भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग आज नई नहीं है। यह मांग छह दशक से अधिक समय...

भिखारी ठाकुर के गीतों में स्त्री चेतना का लोकपक्ष-मनीषा श्रीवास्तव

साहित्य समाज का दर्पण होता है, ऐसा कहा गया है। साहित्यकार जब अपना कलम‌ चलाता है तो वो समाज के संगति व विसंगति दोनो...

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डॉ. संतोष पटेल: भोजपुरी खातिर संघर्षरत एगो मजबूत आवाज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर आज चर्चा अइसन व्यक्तित्व के, जवन भोजपुरी...

भोजपुरी-हिंदी के सशक्त नवगीतकार भगवती प्रसाद द्विवेदी

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल गीत भारतीय काव्य-परंपरा की सर्वाधिक प्राचीन...

भोजपुरी के सोहर में आजो जनमेलन बनवारी, नंद के लाला से मन के कन्हैया तक

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी कुछ दृश्य उम्र के साथ धुँधले...

भोजपुरी के हक पर संसद का ‘मानदंड’ वाला अड़ंगा, मान्यता के लिए लड़ाई जारी रहेगी

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने...
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