पत्रकारिता में करीब 20 वर्षों का अनुभव है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। भोजपुरी संस्कृति, भाषा, खानपान, पहनावे और लोकगीतों के संरक्षण व संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।
पटना: बिहार का खानपान केवल लिट्टी-चोखा या सत्तू तक सीमित नहीं है। इसकी रसोई दरअसल सदियों की यात्राओं, प्रवास, व्यापार, संघर्ष और सांस्कृतिक मेल-मिलाप...