100 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले अवधेश मिश्रा के लिए बिहार के सीतामढ़ी जिले के छोटे से गांव सुतीहारा से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था। उन्होंने इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत महज 2500 रुपए से की थी और आज करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं।
पटना: भोजपुरी सिनेमा की दुनिया में जब भी दमदार खलनायकों की बात होती है, तो अवधेश मिश्रा का नाम सबसे पहले लिया जाता है। तीखे चेहरे के भाव, भारी आवाज, आंखों में उतरता गुस्सा और संवाद बोलने का अनोखा अंदाज, इन सबने उन्हें भोजपुरी फिल्मों का ऐसा विलेन बनाया, जिसे दर्शक भूल नहीं पाते। यही वजह है कि उन्हें अक्सर भोजपुरी सिनेमा का “अमरीश पुरी” कहा जाता है।
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लेकिन सिल्वर स्क्रीन पर खौफ पैदा करने वाला यह कलाकार असल जिंदगी में बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है। बिहार के सीतामढ़ी जिले के छोटे से गांव सुतीहारा से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था। संघर्ष, मेहनत और अभिनय के प्रति जुनून ने ही अवधेश मिश्रा को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज वे भोजपुरी फिल्मों के सबसे भरोसेमंद कलाकारों में गिने जाते हैं।

गांव की मिट्टी से जुड़ी है पहचान
अवधेश मिश्रा का जन्म बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुतीहारा गांव में हुआ। गांव का साधारण माहौल, सीमित संसाधन और संघर्षों से भरी जिंदगी ने उन्हें बचपन से ही मजबूत बनाया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें अभिनय और मंचीय प्रस्तुतियों में रुचि होने लगी थी। स्कूल-कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए उन्होंने महसूस किया कि अभिनय ही उनका असली जुनून है। हालांकि उस दौर में गांव से निकलकर फिल्मों में करियर बनाना किसी सपने जैसा था। परिवार और समाज की अपनी चिंताएं थीं, लेकिन अवधेश ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। वे पटना पहुंचे और थिएटर से जुड़ गए। यही वह दौर था जिसने उनके अंदर के कलाकार को निखारा।
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थिएटर ने सिखाई अभिनय की असली भाषा
पटना में थिएटर करते हुए अवधेश मिश्रा ने अभिनय की बारीकियां सीखीं। मंच पर काम करने से संवाद अदायगी, चेहरे के भाव और किरदार में पूरी तरह ढलने की कला विकसित हुई। थिएटर ने उन्हें अनुशासन और धैर्य भी सिखाया। कई बार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। छोटे-छोटे रोल करते हुए वे लगातार सीखते रहे। यही संघर्ष आगे चलकर उनके अभिनय की सबसे बड़ी ताकत बना। थिएटर के दिनों में ही उनकी मुलाकात कई निर्देशकों और कलाकारों से हुई। धीरे-धीरे भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में उनके लिए रास्ते खुलने लगे। उस समय भोजपुरी सिनेमा तेजी से विस्तार कर रहा था और नए कलाकारों को अवसर मिल रहे थे।

‘दुल्हा अइसन चाही’ से मिली पहचान
साल 2005 में अवधेश मिश्रा को भोजपुरी फिल्म ‘दुल्हा अइसन चाही’ में काम करने का मौका मिला। यह उनके करियर की पहली बड़ी फिल्म थी। फिल्म में उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई और पहली ही फिल्म से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनका अभिनय इतना प्रभावशाली था कि लोग उन्हें नोटिस किए बिना नहीं रह सके। जहां हीरो अपनी जगह बना रहे थे, वहीं अवधेश अपने दमदार विलेन अवतार से दर्शकों के बीच अलग पहचान बना चुके थे।
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक फिल्मों में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिलने लगीं और वे भोजपुरी सिनेमा के सबसे चर्चित खलनायकों में शामिल हो गए।
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क्यों कहलाए भोजपुरी के ‘अमरीश पुरी’
भारतीय सिनेमा में अमरीश पुरी को खलनायकी का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है। भोजपुरी इंडस्ट्री में यह पहचान अवधेश मिश्रा को मिली। इसके पीछे उनकी खास अभिनय शैली रही। उनकी भारी आवाज, आंखों का गुस्सा, चेहरे की गंभीरता और संवाद बोलने का अंदाज दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता है। वे सिर्फ खलनायक नहीं बनते, बल्कि अपने किरदार को पूरी तरह जीते हैं। यही कारण है कि उनकी मौजूदगी फिल्म के हर दृश्य को प्रभावशाली बना देती है।भोजपुरी फिल्मों में उनके कई संवाद आज भी दर्शकों को याद हैं। खास बात यह है कि वे नकारात्मक किरदार निभाते हुए भी अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों का दिल जीत लेते हैं।
भोजपुरी से हिंदी और साउथ फिल्मों तक का सफर
भोजपुरी फिल्मों में सफलता मिलने के बाद अवधेश मिश्रा ने अपने अभिनय का दायरा बढ़ाया। उन्होंने हिंदी फिल्मों और दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया। तमिल फिल्म ‘Poojai’ और हिंदी फिल्म ‘Dirty Politics’ में उनके अभिनय को सराहा गया। इन फिल्मों ने साबित किया कि अवधेश सिर्फ क्षेत्रीय सिनेमा तक सीमित कलाकार नहीं हैं, बल्कि वे हर भाषा और हर तरह के किरदार में खुद को ढालने की क्षमता रखते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई। कई निर्देशकों का मानना है कि अवधेश मिश्रा किसी भी किरदार को वास्तविक बना देने की क्षमता रखते हैं।
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सौ से ज्यादा फिल्मों का शानदार सफर
करीब दो दशक लंबे करियर में अवधेश मिश्रा सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। उन्होंने भोजपुरी सिनेमा के लगभग सभी बड़े सितारों के साथ काम किया है। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान भी मिल चुके हैं। हालांकि सफलता मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी और जमीन से जुड़ाव नहीं छोड़ा। वे अक्सर अपने गांव और बिहार की मिट्टी से जुड़े रहने की बात करते हैं।
हर बड़े एक्टर के साथ कर चुके हैं काम
अवधेश मिश्रा खेसारी लाल यादव, पवन सिंह और रवि किशन जैसे भोजपुरी सुपरस्टार्स के साथ काम कर चुके हैं। आज वे सिर्फ खलनायक की भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कॉमेडी, पिता और बड़े भाई जैसे किरदारों में भी नजर आ रहे हैं, जिन्हें दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं। हालांकि उनकी असली पहचान आज भी दमदार खलनायकी ही मानी जाती है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत विलेन के रूप में की थी, जबकि बचपन में उनका सपना हीरो बनने का था। लेकिन किस्मत ने उन्हें ऐसा मोड़ दिया कि वे कब भोजपुरी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय विलेन बन गए, इसका एहसास उन्हें खुद भी धीरे-धीरे हुआ।
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कभी यार्ड में रात गुजारने को मजबूर थे अवधेश मिश्रा
अवधेश मि
श्रा का संघर्ष किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। आज करोड़ों के आलीशान घर में रहने वाले अवधेश ने जिंदगी में वह दौर भी देखा है, जब उन्हें रेलवे यार्ड में रात बितानी पड़ती थी। करियर बनाने की जिद में उन्होंने कई कठिन हालात झेले। शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं तो उनकी पत्नी स्कूल में टीचर की नौकरी करती थीं, जबकि अवधेश घर का खर्च चलाने के लिए कभी-कभी ड्राइवर का काम भी कर लिया करते थे। आर्थिक तंगी और संघर्ष के बीच उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे। आखिरकार उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम मिलने लगा और फिर उन्होंने सफलता की ऐसी उड़ान भरी कि कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे चर्चित और सम्मानित कलाकारों में गिने जाते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अवधेश मिश्रा की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और सपनों पर विश्वास की कहानी है। छोटे से गांव से निकलकर भोजपुरी सिनेमा के बड़े चेहरे बनना इस बात का प्रमाण है कि अगर मेहनत और लगन सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। आज वे भोजपुरी सिनेमा के मजबूत स्तंभों में गिने जाते हैं। उनकी यात्रा बिहार और भोजपुरी समाज के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।


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