Tag: भोजपुरी संस्कृति

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‘भोजपुरिया बवाल’ और भोजपुरी की छवि, नाम-भाषा और पहचान पर उठे सवाल

विनोद अनुपम, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक बिहार के मुख्यमंत्री किसी भी मंच पर आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं। किसी कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति तय करने के...

भाषा, बाज़ार और अश्लीलता: भोजपुरी ही क्यों गुनहगार?

संतोष पटेल आधुनिक जनसंचार माध्यमों, सोशल मीडिया और डिजिटल एल्गोरिदम के इस युग में किसी संस्कृति या भाषा को बहुत जल्दी किसी एक कटघरे में...

भोजपुरी फिल्मों के गानों से अलग है ‘बिदेसिया’, इसमें बसता है पति-पत्नी के विरह और समाज की पीड़ा का दर्द

पटना। भोजपुरी संस्कृति की पहचान सिर्फ लोकगीतों और फिल्मों के गानों तक सीमित नहीं है। भोजपुरी लोकनाट्य की समृद्ध परंपरा में ‘बिदेसिया’ एक ऐसी...

खाली किताब ना हऽ, छँनत मन के अंजोर हऽ ‘पढ़त-लिखत’

समीक्षक: निलय उपाध्याय आज सुनील कुमार पाठक जी से मुलाकात हुई और सुबह सुंदर हो गई। उनकी किताब मिली। किताब भोजपुरी में है और इसका...

भोजपुरी गीतों में अश्लीलता पर खुशी कक्कड़ की दो टूक, कहा-गीत ऐसे हों जिन्हें परिवार के साथ सुना जा सके

मुजफ्फरपुर। भोजपुरी गीत-संगीत में बढ़ती अश्लीलता को लेकर लोकगायिका खुशी कक्कड़ ने स्पष्ट राय रखी है। उनका कहना है कि भोजपुरी गीत ऐसे होने...

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‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

‘ककहरा’ भोजपुरी काव्य की समकालीन समझ का सार्थक प्रयास

समीक्षक: डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी अपनी वाचिक परंपरा, लोकधर्मी...

‘बार के दीअरी दहा दिहिला’, भोजपुरी गजल आ गीत में माटी के महक के अनमोल संग्रह

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया भोजपुरी साहित्य में गजल आ गीत के...

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