साहित्य

भोजपुरी सिनेमा की सबसे बड़ी समस्या उसकी ‘गंदी इमेज’

मुंबई/पटना: भोजपुरी सिनेमा कभी अपनी सादगी, लोकजीवन और पारिवारिक मूल्यों के लिए जाना जाता था। गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो (1963) जैसी फिल्मों ने...

भोजपुरी कोई हाशिए की भाषा नहीं, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और गहरी परंपरा वाली भाषा:ओरसिनी

फ्रांसेस्का ओरसिनी, जब लंदन से गूंजे भोजपुरी के बोल लंदन/गोरखपुर: भोजपुरी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि भावना है, माटी की खुशबू, लोकगीतों की मिठास और...

गिरमिटिया इतिहास के साक्षी और भोजपुरी-फिजी हिंदी संस्कृति के संरक्षक हैं राजेंद्र प्रसाद

न्यूजीलैंड/फिजी: फिजी के बा (Ba) क्षेत्र में जन्मे राजेंद्र प्रसाद आज इंडो-फिजियन डायस्पोरा के उन दुर्लभ आवाजों में से एक हैं, जो गिरमिटिया अतीत...

पीड़ा की विरह वेदना को अमर कर देता है बिरहा

वाराणसी के ठठेरी बाजार और चौखम्भा इलाके में श्रमिकों के बीच गया गया था पहला पटना/ गोरखपुर: रात का अंधेरा घना हो चुका है। कलकत्ता...

त्रेता युग से जुड़ा है चैता के तार

नई दिल्ली/पटना: भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में चैता (या चइता/चैती) सिर्फ एक मौसमी गीत नहीं बल्कि यह चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) की बसंत ऋतु, राम नवमी,...

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