भोजपुरी और मगही को दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग तेज, गढ़वा में उठी आवाज

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गढ़वा/रांची। भोजपुरी और मगही भाषा को दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। गढ़वा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई संगठनों के प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार से इन भाषाओं को अधिक अधिकार और सम्मान देने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी और मगही केवल संवाद की भाषाएं नहीं हैं, बल्कि इनकी अपनी समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और लोक परंपरा है। करोड़ों लोग इन भाषाओं को बोलते और समझते हैं, इसलिए इन्हें प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर भी उचित स्थान मिलना चाहिए।

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कार्यक्रम में मौजूद भाषा प्रेमियों ने कहा कि मातृभाषाओं को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय संस्कृति और पहचान मजबूत होती है। साथ ही नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भोजपुरी और मगही के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से भी भोजपुरी और मगही को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि इन भाषाओं का व्यापक जनाधार और समृद्ध साहित्यिक योगदान उन्हें संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करता है।

भाषा संगठनों का मानना है कि यदि भोजपुरी और मगही को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिलता है तो सरकारी कामकाज, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में इन भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को लाभ होगा।

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