वरिष्ठ साहित्यकार, फिल्म गीतकार और टीवी पत्रकार मनोज भावुक को भोजपुरी भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘भोजपुरी भाषा शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पटना के बापू सभागार में जी मीडिया द्वारा आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया। इस मौके पर उन्हें ग्लोबल भोजपुरी एम्बेसडर और भोजपुरी आइकॉन जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से भी नवाजा गया।
सारण प्रमंडल के गभीरार गांव निवासी मनोज कुमार सिंह, जिन्हें साहित्य और मीडिया जगत में मनोज भावुक के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से भोजपुरी भाषा के प्रचार-प्रसार और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
साहित्य और सिनेमा के संगम पर जोर
सम्मान प्राप्त करने के बाद मनोज भावुक ने कहा कि भोजपुरी सिनेमा को साहित्य के साथ मिलकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके अनुसार साहित्य और सिनेमा का समन्वय ही किसी भाषा और संस्कृति को समृद्ध बनाता है। उन्होंने भोजपुरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोली जाने वाली भाषा बताते हुए केंद्र सरकार से इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि भोजपुरी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान और भावनाओं का माध्यम है।
वैश्विक स्तर पर भोजपुरी के प्रचार में अहम भूमिका
मनोज भावुक पिछले तीन दशकों से भोजपुरी साहित्य, पत्रकारिता और सिनेमा से जुड़े हुए हैं। वे कवि, लेखक, गीतकार, संपादक, प्रस्तोता और पटकथा लेखक के रूप में अपनी अलग पहचान रखते हैं। ‘भोजपुरी जंक्शन’ के संपादक के तौर पर उन्होंने दुनियाभर के भोजपुरी साहित्यकारों और रचनाकारों को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। भोजपुरी भाषा में भोजपुरी सिनेमा का इतिहास लिखने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। वर्ष 1995 से लगातार सक्रिय मनोज भावुक को इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
देश-विदेश में मिल चुके हैं कई सम्मान
मनोज भावुक को फिल्मफेयर एवं फेमिना का भोजपुरी आइकॉन अवार्ड, भारतीय भाषा परिषद सम्मान, लोकभाषा सम्मान, पाती अक्षर सम्मान और अंजन सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इसके अलावा दुबई, लंदन, मॉरीशस और नेपाल जैसे देशों में भी उन्हें भोजपुरी भाषा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित किया जा चुका है।

