समीक्षक- राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर
भोजपुरी साहित्य के इतिहास पर गंभीर और शोधपरक कार्य अपेक्षाकृत कम हुए हैं। ऐसे समय में ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’ जैसी कृति इस कमी को काफी हद तक पूरा करने वाला महत्वपूर्ण शोधग्रंथ साबित होती है। मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक भोजपुरी कविता की विकास यात्रा को ऐतिहासिक, सामाजिक और साहित्यिक दृष्टि से व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।
लेखक डॉ. ब्रजभूषण मिश्र ने लंबे अध्ययन, शोध और साहित्यिक विश्लेषण के आधार पर भोजपुरी कविता के विभिन्न कालखंडों का एक प्रामाणिक दस्तावेज तैयार किया है। यह ग्रंथ भोजपुरी कविता के उद्भव से लेकर आधुनिक दौर तक की रचनात्मक यात्रा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
इतिहास लेखन की मजबूत आधारशिला
पुस्तक का पहला अध्याय ‘पूर्व पीठिका’ भोजपुरी कविता के इतिहास को समझने की मजबूत नींव रखता है। इसमें साहित्य इतिहास लेखन की अवधारणा, इतिहास दर्शन, भोजपुरी में इतिहास लेखन की परंपरा, कविता लेखन की विकास यात्रा, काल-विभाजन और नामकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की गई है।
यह अध्याय पाठक को भोजपुरी कविता के ऐतिहासिक विकास को समझने के लिए आवश्यक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
आठ कालखंडों में विभाजित भोजपुरी कविता की विकास यात्रा
लेखक ने भोजपुरी कविता के इतिहास को आठ प्रमुख कालखंडों में विभाजित किया है। सिद्ध-नाथ काल (700-1100 ई.) से लेकर समकालीन एवं वर्तमान काल (2001-2019 ई.) तक की साहित्यिक यात्रा को क्रमबद्ध और शोधपरक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें केवल कवियों और उनकी रचनाओं का परिचय नहीं दिया गया है, बल्कि प्रत्येक कालखंड की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का भी विश्लेषण किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि भोजपुरी कविता अपने समय और समाज से किस प्रकार जुड़ी रही है।
लोकगीत से आधुनिक कविता तक का सफर
ग्रंथ का महत्वपूर्ण पक्ष भोजपुरी लोक परंपरा को दिया गया स्थान है। लोकगाथा-लोकगीत काल में लोकगीतों और लोकगाथाओं की ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई है।
वहीं आध्यात्मिक काल में निर्गुण, सरभंग और अन्य काव्यधाराओं का गंभीर अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। देशभक्ति काल में राष्ट्रीय चेतना से जुड़ी कविताओं और लोकगीतों को स्थान दिया गया है।
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इसके अलावा रचनात्मक आंदोलन काल और विकास काल में गीत, नवगीत, जनगीत, गजल, प्रबंध काव्य और हाइकु जैसी आधुनिक विधाओं के विकास का विस्तृत विवरण मिलता है।
समकालीन भोजपुरी कविता का भी समावेश
पुस्तक का अंतिम अध्याय वर्ष 2001 से 2019 ई. तक की समकालीन भोजपुरी कविता को समर्पित है। इसमें नए दौर के कवियों, उनकी रचनात्मक प्रवृत्तियों और बदलते सामाजिक संदर्भों का विश्लेषण किया गया है।
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इस दृष्टि से यह पुस्तक केवल अतीत का इतिहास नहीं बताती, बल्कि भोजपुरी कविता के वर्तमान स्वरूप को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।
शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ
लेखक ने स्पष्ट किया है कि इस ग्रंथ में नेपाल, मॉरीशस और अन्य देशों में लिखी जा रही भोजपुरी कविता को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वहां की साहित्यिक परिस्थितियां और विकास यात्रा अलग हैं। उन क्षेत्रों की कविता का इतिहास स्वतंत्र रूप से लिखा जाना चाहिए।
पुस्तक की भाषा सरल, तथ्य प्रमाणिक और प्रस्तुति क्रमबद्ध है। यही कारण है कि यह शोधार्थियों, विद्यार्थियों, अध्यापकों और भोजपुरी साहित्य के गंभीर पाठकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ बन जाती है।
‘भोजपुरी कविता के इतिहास’ केवल कविता की यात्रा का वर्णन नहीं, बल्कि भोजपुरी समाज की सांस्कृतिक चेतना, लोक परंपरा और साहित्यिक विकास का जीवंत दस्तावेज है। भोजपुरी कविता को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में समझने के इच्छुक पाठकों के लिए यह पुस्तक संग्रहणीय और पठनीय है। मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा इसका प्रकाशन भोजपुरी साहित्य के इतिहास लेखन की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
पुस्तक विवरण
पुस्तक: भोजपुरी कविता के इतिहास
लेखक: डॉ. ब्रजभूषण मिश्र
संपादक: डॉ. अरुण कुमार झा
प्रकाशक: मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली


धन्यवाद, राजेश और हेमंत जी
इस प्रसारण के लिए।