भोजपुरी बोलना शर्म नहीं, गर्व की बात है

Date:

भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं होती, वह किसी समाज की आत्मा होती है। जिस भाषा में मां की लोरी सुनाई देती है, दादी-नानी की कहानियां जीवित रहती हैं और जीवन के पहले संस्कार मिलते हैं, उस भाषा को कमजोर समझना अपनी जड़ों को कमजोर करना है।

आज सवाल भोजपुरी के अस्तित्व का नहीं, बल्कि हमारी सोच का है। करोड़ों लोगों की मातृभाषा भोजपुरी होने के बावजूद कुछ परिवारों में बच्चों से भोजपुरी बोलने में झिझक महसूस की जाती है। हिंदी या अंग्रेजी बोलना आधुनिकता का प्रतीक मान लिया गया है, जबकि भोजपुरी बोलने वालों को कई बार पिछड़ेपन की नजर से देखा जाता है। यह मानसिकता बदलनी होगी।

ये भी पढ़ें-बिहार विधानसभा में गूंजी भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, विधायक आनंद मिश्रा ने उठाई आवाज

भोजपुरी सिर्फ भाषा नहीं, करोड़ों लोगों की पहचान है

भोजपुरी को केवल गांव-देहात की भाषा कहकर सीमित करना उसके गौरव को कम करना है। भोजपुरी में सदियों की संस्कृति बसती है। इसमें सोहर की मिठास है, कजरी की संवेदना है, बिरहा की पीड़ा है, चैता की ऊर्जा है और लोकजीवन की अनगिनत कहानियां हैं।

यह वही भोजपुरी है जिसने गिरमिटिया मजदूरों के साथ समुद्र पार जाकर भी अपनी पहचान बचाए रखी। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद-टोबैगो जैसे देशों में आज भी भोजपुरी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे हुए है।

जिस भाषा ने लाखों प्रवासियों को अपनी मिट्टी से जोड़े रखा, जिस भाषा ने कठिन परिस्थितियों में भी अपना अस्तित्व बचाया, उसे कमजोर या पिछड़ी भाषा कहना करोड़ों लोगों की भावनाओं का अपमान है।

ये भी पढ़ें-भोजपुरी के पास है आठवीं अनुसूची में शामिल होने ले लिए समृद्ध व्याकरण परंपरा, विरोध गलत

भोजपुरी हमारी बोली नहीं, हमारी विरासत है। हमारी पहचान है। हमारा स्वाभिमान है।

घर में भोजपुरी खत्म हुई तो आने वाली पीढ़ी क्या संभालेगी?

किसी भी भाषा को सरकारें नहीं, परिवार बचाते हैं। भाषा का पहला विद्यालय घर होता है। अगर माता-पिता अपने ही बच्चों से भोजपुरी बोलना छोड़ देंगे, तो आने वाली पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कट जाएगी।

आज जरूरत है कि माता-पिता अपने बच्चों से भोजपुरी में बात करने में गर्व महसूस करें। उन्हें भोजपुरी गीत सुनाएं, कहानियां सुनाएं, भोजपुरी साहित्य से जोड़ें।

यह भ्रम दूर करना होगा कि भोजपुरी सीखने से बच्चे हिंदी या अंग्रेजी में पीछे रह जाएंगे। दुनिया के अनेक सफल लोग कई भाषाएं जानते हैं। मातृभाषा किसी की क्षमता को कम नहीं करती, बल्कि सोचने और समझने की शक्ति को बढ़ाती है।

जो बच्चा अपनी मातृभाषा से जुड़ा होता है, वह अपनी संस्कृति और अपनी पहचान से भी मजबूत जुड़ाव रखता है।

भोजपुरी को सिर्फ भावनाओं नहीं, भविष्य की भाषा बनाना होगा

सिर्फ भोजपुरी पर गर्व करने की बात करने से काम नहीं चलेगा। अब भोजपुरी को आधुनिक दुनिया की भाषा बनाना होगा।

ये भी पढ़ें- भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में मिले स्थान, तो बदल सकती है करोड़ों लोगों की तकदीर

भोजपुरी में शिक्षा सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म, वेबसाइट, पॉडकास्ट, फिल्म, ओटीटी कंटेंट, शोध, तकनीकी सामग्री और ज्ञान आधारित सामग्री तैयार करनी होगी।

आज युवा जिस भाषा में इंटरनेट पर ज्ञान और अवसर पाएंगे, उसी भाषा से उनका जुड़ाव बढ़ेगा। भोजपुरी को केवल गीत-संगीत तक सीमित रखने की सोच बदलनी होगी।

विज्ञान, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, तकनीक और समसामयिक विषयों पर भी भोजपुरी में गुणवत्तापूर्ण सामग्री तैयार होनी चाहिए।

भोजपुरी को अतीत की विरासत नहीं, भविष्य की ताकत बनाना होगा।

अधिकार की लड़ाई के साथ आत्मसम्मान का संकल्प भी जरूरी

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। यह मांग केवल भावनाओं की नहीं, बल्कि भोजपुरी की विशाल भाषाई, साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित है। लेकिन संवैधानिक अधिकार की मांग के साथ हमें खुद से भी सवाल करना होगा।

क्या हम अपने बच्चों को भोजपुरी पढ़ाते हैं?

क्या हम भोजपुरी किताबें खरीदते हैं?

क्या हम भोजपुरी में बने अच्छे कंटेंट को बढ़ावा देते हैं?

क्या हम अपनी भाषा बोलने में गर्व महसूस करते हैं?

अगर जवाब नहीं है, तो बदलाव की शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी।

किसी भाषा को सम्मान केवल सरकारी मान्यता से नहीं मिलता, बल्कि उसके बोलने वालों के आत्मविश्वास से मिलता है।

अब समय है भोजपुरी को छिपाने का नहीं, दुनिया के सामने गर्व से रखने का

भोजपुरी को बचाने की नहीं, उसे और मजबूत बनाने की जरूरत है। यह भाषा खत्म होने के खतरे में नहीं, बल्कि नई ऊर्जा के इंतजार में है।

जरूरत है कि युवा भोजपुरी में लिखें, पढ़ें, वीडियो बनाएं, पॉडकास्ट करें और इसे डिजिटल दुनिया की ताकत बनाएं।

हमें यह याद रखना होगा कि हिंदी, अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं का सम्मान करते हुए भी अपनी मातृभाषा पर गर्व किया जा सकता है।

अपनी भाषा से प्रेम करना किसी दूसरी भाषा से नफरत करना नहीं है।

अब समय आ गया है कि भोजपुरी बोलने वाला हर व्यक्ति पूरे आत्मविश्वास से कहे-

“हां, हम भोजपुरी बोलतानी।
ई हमरा भाषा ह, हमरा पहचान ह, हमरा गर्व ह।”

क्योंकि भोजपुरी सिर्फ शब्दों का संसार नहीं है। यह करोड़ों लोगों की स्मृति, संस्कृति, संघर्ष और स्वाभिमान की आवाज है।

बाबा भोजपुरिया
बाबा भोजपुरियाhttp://bhojpuri24.com
पत्रकारिता में करीब 20 वर्षों का अनुभव है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। भोजपुरी संस्कृति, भाषा, खानपान, पहनावे और लोकगीतों के संरक्षण व संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

‘गंगा रतन बिदेसी’ भोजपुरी उपन्यास में प्रवासी जीवन की पीड़ा

समीक्षक: प्रकाश प्रियांशु भोजपुरी साहित्य धारा में उपन्यास विधा अपेक्षाकृत...

भोजपुरी में पढ़ाई जाएंगी कबीर की उलटबांसियां, नए सिलेबस में कबीर से पत्रकारिता तक

पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में भोजपुरी से स्नातक करने...

बिहार के लोकजीवन में प्रेम, बिछोह और प्रवास की कहानी है जट-जटिन नृत्य

उत्तर बिहार की लोकपरंपरा का चर्चित नृत्य, जिसमें पति-पत्नी...