बिहार विधानसभा में गूंजी भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, विधायक आनंद मिश्रा ने उठाई आवाज

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बक्सर/पटना। भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर बिहार विधानसभा में जोरदार तरीके से उठी। बक्सर विधानसभा क्षेत्र से विधायक आनंद मिश्रा ने सदन में भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता देने का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया।

विधायक आनंद मिश्रा ने कहा कि भोजपुरी केवल एक बोली नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की मातृभाषा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की वाहक है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और देश के अन्य हिस्सों के अलावा मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और नेपाल सहित कई देशों में भी भोजपुरी व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है। इसके बावजूद इसे अब तक संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिल सका है।

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उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषा का अपना समृद्ध साहित्य, लोककला, लोकगीत, रंगमंच और सांस्कृतिक इतिहास है। ऐसी स्थिति में इसे संवैधानिक मान्यता मिलना करोड़ों भोजपुरी भाषियों की लंबे समय से चली आ रही मांग है। विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि भोजपुरी के सम्मान और संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कई दशकों से की जा रही है। भाषा के समर्थकों का कहना है कि संवैधानिक मान्यता मिलने से भोजपुरी के संरक्षण, शिक्षा, शोध और सरकारी स्तर पर उपयोग को नई दिशा मिलेगी। झारखंड सरकार पहले ही भोजपुरी को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दे चुकी है, जबकि विभिन्न विश्वविद्यालयों में भोजपुरी का अध्ययन और शोध भी कराया जा रहा है।

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भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि भोजपुरी केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वभर में बसे भारतीय मूल के लोगों की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करना भारतीय भाषाई विरासत को और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

Bhojpuri24.com लगातार भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति और संवैधानिक मान्यता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहा है। भोजपुरी समाज की यह मांग अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय बन चुकी है।

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