भोजपुरी गीत, कविता आ गजल के अनमोल मणिका: डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना

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राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर

भोजपुरी माटी के सोंधी सुवास आ एकर जीवंत लोकसंस्कृति के अपना रचनाकर्म से पूरा देश-दुनिया में फैलावे वाला ख्यातिप्राप्त कवि, गीतकार, गजलकार आ व्यंग्यकार आदरणीय डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना के नाम बहुत आदर के साथ लिहल जाला। मस्ताना जी अइसन साहित्यकार बानी, जेकर हर एगो शब्द भोजपुरी भाषा, माटी आ लोकजीवन के धड़कन के बयां करेला।

जन्म आ पारिवारिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

आदरणीय डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना जी के जनम 1 फरवरी 1954 के बिहार के ऐतिहासिक आ क्रांतिधरा बेतिया (पश्चिमी चंपारण) में भइल। चंपारण के ई उहे पावन धरती हवे, जहाँ से कई गो स्वतंत्रता सेनानी, संत आ प्रख्यात साहित्यकार लोग जनम लेले बा। इहाँ के बचपन अइसन परिवेश में बीतल, जहाँ लोकगीत, लोकसंगीत आ माटी के सोंधापन रगरग में बसल रहे।

मस्ताना जी अपना पूरा जीवन भोजपुरी भाषा आ साहित्य के समर्पित कर दिहले बानी। इहाँ ‘भोजपुरी जन जागरण अभियान’ के प्रमुख संरक्षक भी बानी।

जमशेदपुर आगमन पर ‘भोजपुरी जन जागरण अभियान’ के तहत स्थानीय प्रताप कल्याण केंद्र, छोटागोविंदपुर, जमशेदपुर में इहाँ के स्वागत-अभिनंदन खातिर एगो भव्य ‘सम्मान सह काव्य गोष्ठी’ के आयोजन कइल गइल रहे। एह आयोजन से भोजपुरी समाज में इहाँ के लोकप्रियता आ सम्मान के साफ झलक मिलेला।

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शिक्षा-दीक्षा आ शैक्षणिक योगदान

डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना जी साहित्य के संगे-संग संगीत में भी गहिर पकड़ राखत बानी। इहाँ के शैक्षणिक योग्यता आ उपाधि निम्नलिखित बा—

  • एम.ए. (हिन्दी) — बिहार विश्वविद्यालय
  • संगीत प्रभाकरसंगीत भास्कर — संगीत के क्षेत्र में विशेष महारत
  • पीएचडी — ‘देवव्रत शास्त्री : व्यक्तित्व आ कृतित्व’ विषय पर बिहार विश्वविद्यालय से

अपना जन्मभूमि बेतिया के राज इंटर कॉलेज में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक के रूप में लमहर समय तक सेवा देबे के बाद इहाँ सेवानिवृत्त हो चुकल बानी। फिलहाल अपना पूरा समय आ ऊर्जा भोजपुरी आ हिन्दी साहित्य के सृजन में लगवले बानी।

बहुआयामी रचनाकार: कविता, गीत, गजल आ संगीत में महारत

मस्ताना जी कवनो एके विधा के रचनाकार नइखी, बल्कि इहाँ कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, लघुकथा आ उपन्यास सहित कई गो विधा में बेजोड़ कलम चलवले बानी।

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संगीत के बढ़िया जानकारी होखे के कारण इहाँ के रचना में लय, ताल आ आरोह-अवरोह के गजब के जादू देखे के मिलेला। राष्ट्रीय मंचन पर इहाँ के सस्वर पैरोडी सुन के लोग मंत्रमुग्ध हो जाला।

इहाँ के भावप्रेरक रचनन में समाज के हर एगो पहलू पर नजर पड़ेला। गांधी बाबा पर लिखल इहाँ के ई लोकप्रिय पंक्ति मन मोह लेला—

“अच्छा बा गाँधी बाबा, रउआ ना जीयत बानीं,
इज्जत से आपन गुदरी, सरगे में सीयत बानीं।”

मंचीय प्रस्तुति आ लोकजीवन के चित्र

मस्ताना जी के मंचीय अंदाज के सभे कायल बा। वर्तमान समय, व्यवस्था आ इंसानियत के हालात पर इहाँ के गीत के बानगी देखते बनेला—

“कागज वाला नाव पर चढ़ के उतरब कइसे पार, अथाहल पानी बा, अथाहल पानी बा।
टूटल छतरी से रोकब कइसे बरखा के धार, हवा तूफानी बा, हवा तूफानी बा…”

इहाँ के रचनन में लोकजीवन के अनुभव, आम आदमी के पीड़ा आ सामाजिक व्यवस्था के विडंबना एक साथ दिखाई देला।

पितृ दिवस पर मर्मस्पर्शी रचना

पिता के महिमा आ दुलार पर लिखल इहाँ के एगो भोजपुरी गीत हर बाप-बेटा के रिश्ता के जीवंत कर देला—

“बाबू जी के चरनियां चारो धाम लागेला,
उनका नेहिया के छांहे कहां घाम लागेला।
भोरे-भोरे जब दुलरावस,
लेमचूस दे-दे के फुसलावस…
उनकर बोलिए हमके जइसे जरदा आम लागेला।
बाबूजी के चरनियां चारों धाम लागेला…”

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भोजपुरी आ हिन्दी साहित्य के समृद्ध कृतियां

डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना जी के दर्जनन गो किताब प्रकाशित हो चुकल बा, जवन भोजपुरी आ हिन्दी साहित्य के समृद्ध भंडार मानल जाला।

भोजपुरी भाषा में प्रकाशित कृति

  • जिनगी पहाड़ हो गईल — भोजपुरी काव्य संग्रह। ई किताब जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा आ वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के एम.ए. (भोजपुरी) पाठ्यक्रम में शामिल बा।
  • एकलव्य — भोजपुरी खंड काव्य
  • लगाव — भोजपुरी लघुकथा संग्रह। ई इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली के भोजपुरी सर्टिफिकेट कोर्स में शामिल बा।
  • अगरासन — भोजपुरी कथा संग्रह
  • अंजुरी में अँजोर — भोजपुरी काव्य संग्रह
  • बहुजन के अनमोल रतन — भोजपुरी काव्य संग्रह
  • तरेगन के मेला — भोजपुरी नाटक संग्रह
  • पहुना — भोजपुरी उपन्यास

हिन्दी भाषा में प्रकाशित कृति

  • गीत मरते नहीं — हिन्दी गीति काव्य संग्रह
  • बिंदु से सिंधु तक — हिन्दी काव्य संग्रह
  • रेत में फुहार — हिन्दी गीति काव्य संग्रह
  • पुण्य-पंथी — हिन्दी महाकाव्य
  • तथागत — हिन्दी खंडकाव्य
  • धूप की लकीरें — हिन्दी कथा संग्रह
  • धरती से धरती मिले — हिन्दी उपन्यास
  • गीतों के गांव में — हिन्दी गीत संग्रह
  • अक्षर अक्षर बोलेगा — कविता साझा संकलन, संपादन

इहाँ के इग्नूएससीईआरटी, पटना खातिर भोजपुरी सर्टिफिकेट कोर्स आ संगीत के पाठ्यक्रम निर्माण आ संपादन में भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिहले बानी।

वीर कुंवर सिंह के शौर्य के जगावेला मस्ताना जी के कलम

वीर कुंवर सिंह के विजय दिवस पर ओजस्वी रचना के माध्यम से मस्ताना जी जब इतिहास आ वीरता के बात करेनी, त इहाँ के कलम से ओज टपकेला। बाबू वीर कुंवर सिंह के विजय दिवस पर लिखल इहाँ के रचना भोजपुरी माटी के शौर्य के जगावेला—

“करीं हिया से ईयाद हमनी, कुंअर सिंह बलिदानी के,
अस्सी बरिस के हड्डी में, जागल ओ, जोस जवानी के।
रहलें शेर बिहारी बाबू, कुंअर सिंह मरदाना,
अंग्रेजन ला मउअत रहलें, जाने जगत जमाना,
वंदन, चंदन करे समय ओ, स्वतंत्रता सेनानी के।”

साहित्य आ संगीत के क्षेत्र में मिलल सम्मान

साहित्य आ संगीत के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान खातिर डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना जी के देश के कई गो प्रतिष्ठित संस्थान आ सरकार द्वारा सम्मानित कइल गइल बा। इहाँ के मिलल प्रमुख सम्मानन में शामिल बा—

  • जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन सम्मान — 1976
  • बिहार विश्वविद्यालय सम्मान — 1976, बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा भोजपुरी लोकगीत गायन खातिर
  • ललितकला परिषद सम्मान — 1981, बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा
  • पंडित हंस कुमार तिवारी नामित प्रशस्ति पत्र — 1990, बिहार राजभाषा विभाग, भागलपुर
  • रामेश्वर सिंह कश्यप सम्मान — 1993, अखिल भारतीय भाषा सम्मेलन, देवघर
  • नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान सम्मान पत्र, काठमांडू, हिन्दी वर्ष-2052
  • साहित्यिक संस्थान ‘तलाश’ सम्मान — 1997, पूर्वी चंपारण
  • महर्षि कबीर सम्मान — 2003, अखिल भारतीय साधु समाज, नई दिल्ली
  • भोजपुरी गौरव सम्मान — 2008, विश्व भोजपुरी सम्मेलन
  • महेंद्र शास्त्री सम्मान — 2009, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पटना
  • भोजपुरी दिनकर सम्मान — 2010, समाधान संस्था
  • पंडित गणेश चौबे सम्मान — 2012, विश्व भोजपुरी सम्मेलन, नई दिल्ली
  • बिहार गौरव सम्मान — 2012, बिहार सरकार
  • भोजपुरी अकादमी सम्मान — 2013, बिहार सरकार
  • भोजपुरी रत्न सम्मान — 2014, जन मीडिया, नई दिल्ली
  • चंपारण साहित्य विभूति सम्मान — 2016, चंपारण शताब्दी समारोह में भारत सरकार के कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह द्वारा
  • साहित्य गौरव सम्मान, डिफेंडर पत्रिका, नई दिल्ली

एकरा अलावा भी देश के कई गो छोट-बड़ मंचन पर इहाँ के सम्मानित कइल गइल बा।

आकाशवाणी आ दूरदर्शन के मंच तक पहुंचल आवाज

आकाशवाणी पटना, भागलपुर, दूरदर्शन पटना, मुजफ्फरपुरमहुआ टीवी नियन कई गो राष्ट्रीय चैनल आ मंचन पर इहाँ के काव्य पाठ के गूंज सुनाई देले बा।

स्वभाव से अति कोमल, सहृदय, मिलनसार आ शालीन व्यक्तित्व के धनी डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना जी भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के सिरमौर साहित्यकारन में गिनल जानी।

मस्ताना चाचाजी हमेशा स्वस्थ रहीं, दीर्घायु होखीं आ साहित्य के ई भंडार अइसहीं भरत रहे—इहे कामना बा। इहाँ के रचनाकारिता हमनी खातिर गर्व के विषय बा आ नाया पीढ़ी खातिर प्रेरणा के स्रोत बा।

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