Tag: भोजपुरी अस्मिता

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भोजपुरिये के नाँव प काहे संसद में चुप बानी?’: मनोज भावुक की कविता में संवैधानिक पहचान की मांग को आवाज

भोजपुरी को हेय दृष्टि से देखने वाली सोच पर व्यंग्य, भाषा के सम्मान और संवैधानिक पहचान की मांग को आवाज भोजपुरी भाषा और संस्कृति के...

‘मालिक बहुत मानते हैं’, भोजपुरी की दुर्दशा पर मनोज भावुक का करारा व्यंग्य

भोजपुरी को हेय दृष्टि से देखने वालों पर व्यंग्य के जरिए उठाई आवाज, भाषा और संस्कृति के सम्मान का संदेश भोजपुरी भाषा और संस्कृति को...

भोजपुरी बोलना शर्म नहीं, गर्व की बात है

भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं होती, वह किसी समाज की आत्मा होती है। जिस भाषा में मां की लोरी सुनाई देती है, दादी-नानी...

बिहार विधानसभा में गूंजी भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, विधायक आनंद मिश्रा ने उठाई आवाज

बक्सर/पटना। भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर बिहार विधानसभा में जोरदार तरीके से उठी।...

सवाल बा भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता अब ले काहे ना ? दोषी के ?

कनक किशोर, राँची ( झारखंड ) जन कवि विजेंद्र अनिल के एगो कविता के लाइन ह- 'लाली हम भोर के, गीत हम अंजोर के'। जन...

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भोजपुरी की उपेक्षा और राजनीति का दोहरा चरित्र

डॉ. संतोष पटेल भारत का बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी ढांचा हमेशा...

‘डुबि गइल गाँव-घर-बधार…’ बाढ़ की त्रासदी और किसान के दर्द का मर्मस्पर्शी दस्तावेज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व पत्रकार दिनेश्वर प्रसाद...

लोक-संस्कृति की अमर धरोहर, जनवादी कविराज-गीतकार शैलेंद्र

 डॉ. संतोष पटेल जन्मदिन विशेष: शैलेंद्र ने भारत की पहली...

‘बिगुल’ का पराग पर एकाग्र विशेषांक, भोजपुरी साहित्य के एक मनीषी का सार्थक पुनर्पाठ

समीक्षक : डॉ. सुनील कुमार पाठक साहित्यिक पत्रिकाओं के लगातार...

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