'किसी का सत्य था,
मैंने संदर्भ में जोड़ दिया।
कोई मधुकोष काट लाया था,
मैंने निचोड़ लिया।
यो मैं कवि हूँ, आधुनिक हूँ, नया हूँ,
काव्य-तत्त्व की खोज में...
मुक्तक
भोजपुरिया अब बोल रहल, माटी ह अनमोल
जहाँ गूँजल बा राजेन्द्र आ जयप्रकाश के बोल
कुंवर के धरती,बुद्ध,गांधी के इहे देखवलस राह
ई धरती पर पैदा भइले,...