साहित्य

‘मालिक बहुत मानते हैं’, भोजपुरी की दुर्दशा पर मनोज भावुक का करारा व्यंग्य

भोजपुरी को हेय दृष्टि से देखने वालों पर व्यंग्य के जरिए उठाई आवाज, भाषा और संस्कृति के सम्मान का संदेश भोजपुरी भाषा और संस्कृति को...

‘एकलव्य’ :गुरु-शिष्य परंपरा, सामाजिक समरसता और दलित चेतना का विशेष काव्य दस्तावेज

हालिया सन्दर्भ: प्रसिद्ध पब्लिशिंग हाउस ‘सेज’ (SAGE) से डॉ. गोरख प्रसाद ‘मस्ताना’ की पुस्तक ‘एकलव्य’ पर आधारित डॉ. दीपक कश्यप का शोध-आलेख ‘Sociology of...

दिल्ली में 9 अगस्त को गूंजेगी भोजपुरी कविता, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में जुटेंगे रचनाकार

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हर घर तिरंगा-2026’ अभियान के तहत दिल्ली में अखिल भारतीय संस्कृत, मैथिली और भोजपुरी कवि सम्मेलन...

‘सँउसे चान आकासे’ भोजपुरी लोकजीवन, मातृभाषा और संवेदनाओं का उज्ज्वल काव्य-संसार

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया 'सँउसे चान आकासे' भोजपुरी की चर्चित कवयित्री डॉ. वीणा पाण्डेय 'भारती' का पहला भोजपुरी काव्य-संग्रह है। इसका प्रकाशन जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद्...

भोजपुरी कविता की संवेदना, सौंदर्यशीलता और आलोचना-दृष्टि का प्रामाणिक दस्तावेज है -‘भोजपुरी कविता : रुचि आ रचाव’

समीक्षक : सूर्यदेव पाठक 'पराग' भोजपुरी साहित्य में सृजनात्मक विधाओं के समानान्तर आलोचना और समीक्षा- लेखन की परंपरा अपेक्षाकृत कम विकसित रही है। ऐसे समय...

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