साहित्य

भोजपुरी कविता की संवेदना, सौंदर्यशीलता और आलोचना-दृष्टि का प्रामाणिक दस्तावेज है -‘भोजपुरी कविता : रुचि आ रचाव’

समीक्षक : सूर्यदेव पाठक 'पराग' भोजपुरी साहित्य में सृजनात्मक विधाओं के समानान्तर आलोचना और समीक्षा- लेखन की परंपरा अपेक्षाकृत कम विकसित रही है। ऐसे समय...

नारी संवेदना, सामाजिक यथार्थ और संघर्ष का दस्तावेज है डॉ. संध्या सिन्हा का कहानी संग्रह ‘जिनगी के धाह, जीये के चाह’

समीक्षा : राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा में कथा विधा हमेशा से समाज के जीवन, संघर्ष, संस्कार और संवेदनाओं का सजीव दस्तावेज...

भोजपुरी कविता की विकास यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज है ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’

समीक्षक- राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य के इतिहास पर गंभीर और शोधपरक कार्य अपेक्षाकृत कम हुए हैं। ऐसे समय में ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’ जैसी...

पुस्तक समीक्षा : भोजपुरी भाषा-साहित्य के इतिहास का प्रामाणिक दस्तावेज है ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास’

समीक्षक : डॉ. लारी आज़ाद भोजपुरी भाषा और साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास’ की चर्चा विशेष रूप से प्रासंगिक है।...

भोजपुरी संत साहित्य, जहां भक्ति, समता और लोकमंगल की धारा बहती है

कनक किशोर, राँची, झारखंड संत समता की अवधारणा के पोषक होते हैं। भोजपुरिया संस्कृति में संतोष और समरसता गहराई तक भरी हुई है। संभवतः इसका...

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