Tag: भोजपुरी साहित्य

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लोकजीवन, लोकसंवेदना और बदलते गाँव की पीड़ा का काव्य-दस्तावेज : ‘नेह के थुन्हीं-टाटी हऽ गाँव’

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी साहित्य भारतीय लोकजीवन की सांस्कृतिक स्मृतियों, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त साहित्य है। इसकी रचनात्मक परंपरा...

बिहार विधानसभा में गूंजी भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, विधायक आनंद मिश्रा ने उठाई आवाज

बक्सर/पटना। भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर बिहार विधानसभा में जोरदार तरीके से उठी।...

सवाल बा भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता अब ले काहे ना ? दोषी के ?

कनक किशोर, राँची ( झारखंड ) जन कवि विजेंद्र अनिल के एगो कविता के लाइन ह- 'लाली हम भोर के, गीत हम अंजोर के'। जन...

परिचय दास : जिन्होंने भोजपुरी को लोकभाषा से साहित्यिक विमर्श की वैश्विक पहचान तक पहुंचाया

Bhojpuri24.com की शृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय उस बहुआयामी साहित्यकार का, जिन्होंने भोजपुरी को केवल लोकगीतों और लोककथाओं की भाषा मानने की संकीर्ण...

लोकजीवन के कवि डॉ. कमलेश राय, जिन्होंने भोजपुरी को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया

Bhojpuri24.com की विशेष श्रृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय उस साहित्य साधक का, जिन्होंने भोजपुरी भाषा को केवल लोकभाषा के रूप में नहीं देखा,...

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डॉ. संतोष पटेल: भोजपुरी खातिर संघर्षरत एगो मजबूत आवाज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर आज चर्चा अइसन व्यक्तित्व के, जवन भोजपुरी...

भोजपुरी-हिंदी के सशक्त नवगीतकार भगवती प्रसाद द्विवेदी

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल गीत भारतीय काव्य-परंपरा की सर्वाधिक प्राचीन...

भोजपुरी के सोहर में आजो जनमेलन बनवारी, नंद के लाला से मन के कन्हैया तक

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी कुछ दृश्य उम्र के साथ धुँधले...

भोजपुरी के हक पर संसद का ‘मानदंड’ वाला अड़ंगा, मान्यता के लिए लड़ाई जारी रहेगी

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने...

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