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Exclusive articles:

लोकजीवन, लोकसंवेदना और बदलते गाँव की पीड़ा का काव्य-दस्तावेज : ‘नेह के थुन्हीं-टाटी हऽ गाँव’

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी साहित्य भारतीय लोकजीवन की सांस्कृतिक स्मृतियों, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त साहित्य है। इसकी रचनात्मक परंपरा...

लोकस्वरों के तपस्वी और भोजपुरी संस्कृति के वैश्विक प्रतिनिधि हैं डॉ. राकेश श्रीवास्तव

Bhojpuri24.com की विशेष श्रृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय उस लोकसाधक का, जिसने भोजपुरी लोकगीतों को केवल गायन की परंपरा तक सीमित नहीं रखा,...

भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव पर भड़कीं मलाइका अरोड़ा बोलीं, ये बेवकूफ आदमी है कौन, वाहियात

कुत्ते वाले विवाद पर मलाइका अरोड़ा ने खेसारी लाल यादव को लगाई फटकार मुंबई। भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव एक बार फिर चर्चा में हैं।...

भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग हुई तेज

डॉ. पीएन सिंह कॉलेज में भोजपुरी पर मंथन छपरा। भोजपुरी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और संवैधानिक मान्यता की मांग को लेकर सारण जिले के डॉ....

बिहार विधानसभा में गूंजी भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, विधायक आनंद मिश्रा ने उठाई आवाज

बक्सर/पटना। भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर बिहार विधानसभा में जोरदार तरीके से उठी।...

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‘माटी-पानी’ भोजपुरी अस्मिता, लोक-संस्कृति आ जीवन-बोध के जीवंत दस्तावेज

डॉ. संतोष पटेल पेशा से पत्रकार आ हृदय से लेखक...

भोजपुरी सिनेमा को अश्लीलता के चश्मे से देखना गलत-मोनालिसा

बोलीं- कुछ वायरल गानों से नहीं तय होती भोजपुरी...

भोजपुरी भाषी लोगों को ‘भोजपुरी बवाल’ शो नहीं देखना चाहिए

बाबा भोजपुरिया भोजपुरी के नाम पर सतही मनोरंजन और...

भोजपुरी की उपेक्षा और राजनीति का दोहरा चरित्र

डॉ. संतोष पटेल भारत का बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी ढांचा हमेशा...
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