डॉ. संतोष पटेल: भोजपुरी खातिर संघर्षरत एगो मजबूत आवाज

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राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर

आज चर्चा अइसन व्यक्तित्व के, जवन भोजपुरी खातिर समर्पित रहल बा। ‘भोजपुरी जन जागरण अभियान’ के बैनर अपना भाषा भोजपुरी खातिर निरंतर प्रयासरत बा। समय-समय पर आपन आवाज बुलंद करत रहल बा, जेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बानी डॉ. संतोष पटेल। इहां के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे के अभियान छेड़ चुकल बानी। जब ले भोजपुरी के मान्यता नइखे मिलत, प्रयास लगातार जारी बा। रउआ सभे इहां के कबो धरना-प्रदर्शन करत दिल्ली के जंतर-मंतर पर, त कबो साहित्यिक, कविता के मंच पर भी देख सकत बानी। उठत-सुतत भोजपुरी। भोजपुरी कविता भी अइसन कि ओही में जिये के प्रयास नजर आवेला। ओकरे जीवंत उदाहरण बा भोजपुरी काव्य संग्रह “भोर भिनुसार” आ हिन्दी काव्य संकलन “जारी है लड़ाई”।

हमनी के सौभाग्यशाली बानी जा कि संतोष पटेल भइया के सानिध्य मिलल आ आंदोलन “भोजपुरी जन जागरण अभियान” के शुरुआती दौर से ही जुड़ाव रहल बा, बल्कि कही कि ओकरो से पहिले ले जुड़ाव बा। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. संतोष पटेल कवनो परिचय के मोहताज नइखी। इहां के जनम 4 मार्च, 1974 के बेतिया (पश्चिमी चम्पारण), बिहार में भइल रहे।

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इहां के पढ़ाई-लिखाई के चर्चा कइला पर प्रतिभा अपने आप सामने उजागर हो जाला—रिसर्च स्कॉलर, इग्नू, नई दिल्ली से, भीम राव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय से प्री पी-एच.डी. भोजपुरी में, यूजीसी नेट (हिन्दी में), एम.ए. अंगरेजी में, एम.फिल अंगरेजी में प्रथम श्रेणी, एम.ए. (भोजपुरी में) प्रथम श्रेणी में प्रथम आ एकरे खातिर बिहार के राज्यपाल से स्वर्ण पदक प्राप्त। स्नातकोत्तर डिप्लोमा अनुवाद में, डिप्लोमा इन पाली लैंग्वेज राष्ट्रीय संस्थान, दिल्ली से। एकरा अलावा इहां के संगीत गायन में भी डिप्लोमा कइले बानी। डॉक्टरेट के उपाधि मिलला पर डॉ. संतोष पटेल हो गइनी। भोजपुरी आ हिन्दी कविता साहित्य में भी बेजोड़ पकड़ बा। इहां के आजुओ विभिन्न-विभिन्न विषयन पर साहित्यकारन के पुस्तक के अध्ययन करत रहेनी।

डॉ. संतोष पटेल के भोजपुरी में प्रकाशित किताब बाड़ी सन, जवना में-‘भोर भिनुसार’ (भोजपुरी काव्य संग्रह), मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा प्रकाशित, ‘अदहन’ (भोजपुरी काव्य संग्रह), “अछरंग” (भोजपुरी काव्य संग्रह), ‘अनबोलता (भोजपुरी काव्य संग्रह), “अपने देसवा निक बा” (भोजपुरी कहानी संग्रह) आ “भोजपुरी साहित्य के विविध आयाम” भोजपुरी आलोचना साहित्य (मैथिली भोजपुरी अकादमी से प्रकाशित) प्रमुख बाड़ी सन। आ कुछ प्रकाशन के कतार में बाड़ी सन।

इहां के हिन्दी में प्रकाशित कुछ किताबन में-“गीतों की छांव में” (हिन्दी काव्य संग्रह), “जारी है लड़ाई” (हिन्दी काव्य संग्रह), “नो क्लीन चिट” (हिन्दी काव्य संग्रह), “कारक के चिन्ह” (हिन्दी काव्य संग्रह), “अमीबा” (हिन्दी काव्य संग्रह), “बेड़ियों को तोड़ने की सजा” (हिन्दी काव्य संग्रह), “छायावाद के प्रवर्तक” (हिन्दी आलोचना)।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित/अनुदित किताब- ‘A comparative study of Lungi and Bharatnatyam’ “Lungi: Dance of Soul and Love” प्रमुख बाड़ी सन। एकरा अलावे कई गो संग्रह प्रकाशन के कतार में बाड़ी सन, जवना में—’भोजपुरी आंदोलन के विविध आयाम’, काव्य संग्रह, सबाल्टर्न भोजपुरी कवि आ काव्य पर आधारित संग्रह प्रमुख बाड़ी सन। देश के कई गो प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकन में इहां के रचना के प्रकाशन बराबर होत रहल बा।

डॉ. संतोष पटेल द्वारा कई गो पत्र-पत्रिका के सम्पादन भी कइल गइल बा आ साहित्य सम्पादक भी रहल बानी। जइसे”भोजपुरी जिंदगी” (सम्पादन), “पूर्वांकुर” (हिन्दी-भोजपुरी, सह-सम्पादन), “डिफेंडर” (हिन्दी-भोजपुरी-अंगरेजी में निकले वाली पत्रिका के साहित्य सम्पादक), “उपासना समय” (हिन्दी के साहित्य सम्पादक), “रियल वाच” (हिन्दी के साहित्य सम्पादक), विचार, निरंतर, सकल मना, संभव न्यूज इत्यादि प्रमुख बाड़ी सन।

इहां के अनुवाद में भी हाथ अजमवले बानी। विश्व साहित्य के कवितन के अंगरेजी से भोजपुरी में अनुवाद प्रसंसनीय बा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा भारत जन जत्था के हिन्दी आ अंगरेजी में प्रकाशित 13 गो खण्ड के भोजपुरी में अनुवाद सराहनीय बा। एकरा अलावा कई गो दोसर भाषा के काव्य के भी भोजपुरी में अनुवाद कइले बानी।

इहां के कई गो साझा संग्रह भी आइल बा, जवना में—मशाल, मशाल-2, मशाल-3, शब्दों की अदालत में, अक्षर-अक्षर बोलेगा, काठमांडू, नेपाल से प्रकाशित शब्दों की गूँज (भोजपुरी गद्य-पद्य संग्रह), एक स्वर मेरा भी प्रमुख बाड़ी सन।

इहां के भोजपुरी कविता के जयप्रकाश विश्वविद्यालय में एम.ए. भोजपुरी पाठ्यक्रम खातिर चुनल गइल बा। साथे-साथ इहां के भोजपुरी सर्टिफिकेट कोर्स निर्माण समिति, इग्नू (दिल्ली) के सदस्य भी रहल बानी।

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आदरणीय संतोष पटेल द्वारा कई गो राष्ट्रीय मंच से आपन कविता के सस्वर पाठ भी कइले बानी। इहां के कविता के सुन के लोग आनंदित हो जाला।

इहां के कई गो संस्थन से भी जुड़ाव रहल बा, जवना में—’अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन’, ‘पुरवईया’, ‘पूर्वांचल एकता मंच’, ‘अखिल भारतीय भोजपुरी लेखक संघ’, ‘भोजपुरी जन जागरण अभियान’, ‘भारतीय भोजपुरी समाज’ इत्यादि प्रमुख बाड़ी सन। कई गो मंच से इहां के सम्मानित भी कइल गइल बा।

इहां के लगातार भोजपुरी साहित्य पर रिसर्च आ पढ़ाई कर रहल बानी। इहां के आज के युवा पीढ़ी खातिर प्रेरणा आ मार्गदर्शक बानी। अइसन व्यक्तित्व के पाके चम्पारण के धरती भी गौरवान्वित महसूस कर रहल बा।

इहां के नेतृत्व में भोजपुरी के माँग के लेके ‘भोजपुरी जन जागरण अभियान’ राष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता खातिर लगातार धरना-प्रदर्शन के माध्यम से केन्द्र सरकार तक आपन बात पहुँचा रहल बा। अबही तक ले अठाईस गो धरना-प्रदर्शन हो चुकल बा, दिल्ली के जंतर-मंतर पर। एह अभियान में लागल सभे प्रतिनिधि आ सदस्य लोग भी पूरा जीव-जान से लागल बा।

संतोष पटेल भइया भोजपुरी के एगो मजबूत खाम्भा लेखा आन्दोलन के नेतृत्व कर रहल बानी, जवना में हमनियो के ईमानदारी के साथ सक्रिय रह के अभियान के आगे बढ़ा रहल बानी जा।

इहां से आंदोलन से पहिले से जुड़ाव बा। इहां के बाबूजी आदरणीय डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना जी राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त कवि आ साहित्यकार बानी। संतोष पटेल के घरही से प्रेरणा आ आशीर्वाद मिलत रहल बा अपना बाबूजी का ओर से। इहां के स्वस्थ रहीं, दीर्घायु होखी आ आंदोलन के साथे-साथ भोजपुरी साहित्य के आउर ऊँचाई प्रदान करीं। इहे कामना बा।

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