गोरखपुर: गोरखपुर प्रेस क्लब में रविवार को भोजपुरी संगम की ओर से आयोजित भव्य सम्मान समारोह में भोजपुरी भाषा और साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रामदरश राय को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कवियों, शोधार्थियों और भोजपुरी प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
इस अवसर पर वक्ताओं ने भोजपुरी भाषा के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भोजपुरी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक पहचान है। भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है।
प्रो. रामदरश राय के साहित्यिक अवदान को सराहा
समारोह में वक्ताओं ने प्रो. रामदरश राय के साहित्यिक जीवन और उनके योगदान की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रो. राय ने अपने लेखन के माध्यम से भोजपुरी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनकी रचनाओं में गांव, लोकजीवन, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है, जो पाठकों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि प्रो. रामदरश राय का साहित्य आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है और भोजपुरी भाषा के प्रति सम्मान और आत्मगौरव की भावना को मजबूत करता है।
युवाओं को भोजपुरी से जोड़ने पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्तमान समय में युवाओं को भोजपुरी भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति से जोड़ना सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भोजपुरी के अध्ययन को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर भी भोजपुरी सामग्री को अधिकाधिक स्थान दिए जाने की जरूरत है।
वक्ताओं ने कहा कि यदि नई पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ी रहेगी, तभी भोजपुरी का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध होगा। उन्होंने साहित्यिक गोष्ठियों, सांस्कृतिक आयोजनों और शोध गतिविधियों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
भोजपुरी भाषा के प्रचार-प्रसार का संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर भोजपुरी संगम के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी भोजपुरी भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे आयोजनों का सिलसिला जारी रखेगी।
पूरे समारोह के दौरान भोजपुरी भाषा के प्रति लोगों का उत्साह, आत्मीयता और समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। यह आयोजन भोजपुरी समाज के लिए भाषा और संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।

