Tag: भोजपुरी संस्कृति

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भाषा, बाज़ार और अश्लीलता: भोजपुरी ही क्यों गुनहगार?

संतोष पटेल आधुनिक जनसंचार माध्यमों, सोशल मीडिया और डिजिटल एल्गोरिदम के इस युग में किसी संस्कृति या भाषा को बहुत जल्दी किसी एक कटघरे में...

भोजपुरी फिल्मों के गानों से अलग है ‘बिदेसिया’, इसमें बसता है पति-पत्नी के विरह और समाज की पीड़ा का दर्द

पटना। भोजपुरी संस्कृति की पहचान सिर्फ लोकगीतों और फिल्मों के गानों तक सीमित नहीं है। भोजपुरी लोकनाट्य की समृद्ध परंपरा में ‘बिदेसिया’ एक ऐसी...

खाली किताब ना हऽ, छँनत मन के अंजोर हऽ ‘पढ़त-लिखत’

समीक्षक: निलय उपाध्याय आज सुनील कुमार पाठक जी से मुलाकात हुई और सुबह सुंदर हो गई। उनकी किताब मिली। किताब भोजपुरी में है और इसका...

भोजपुरी गीतों में अश्लीलता पर खुशी कक्कड़ की दो टूक, कहा-गीत ऐसे हों जिन्हें परिवार के साथ सुना जा सके

मुजफ्फरपुर। भोजपुरी गीत-संगीत में बढ़ती अश्लीलता को लेकर लोकगायिका खुशी कक्कड़ ने स्पष्ट राय रखी है। उनका कहना है कि भोजपुरी गीत ऐसे होने...

‘गंगा रतन बिदेसी’ भोजपुरी उपन्यास में प्रवासी जीवन की पीड़ा

समीक्षक: प्रकाश प्रियांशु भोजपुरी साहित्य धारा में उपन्यास विधा अपेक्षाकृत नई है, लेकिन इसमें जीवन के गहरे अनुभवों को प्रस्तुत करने की क्षमता अद्भुत रही...

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भोजपुरी की उपेक्षा और राजनीति का दोहरा चरित्र

डॉ. संतोष पटेल भारत का बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी ढांचा हमेशा...

‘डुबि गइल गाँव-घर-बधार…’ बाढ़ की त्रासदी और किसान के दर्द का मर्मस्पर्शी दस्तावेज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व पत्रकार दिनेश्वर प्रसाद...

लोक-संस्कृति की अमर धरोहर, जनवादी कविराज-गीतकार शैलेंद्र

 डॉ. संतोष पटेल जन्मदिन विशेष: शैलेंद्र ने भारत की पहली...

‘बिगुल’ का पराग पर एकाग्र विशेषांक, भोजपुरी साहित्य के एक मनीषी का सार्थक पुनर्पाठ

समीक्षक : डॉ. सुनील कुमार पाठक साहित्यिक पत्रिकाओं के लगातार...

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