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1728 की ‘बारह मासी’ से शुरू हुई थी भोजपुरी साहित्य की शुरुआती लिखित परंपरा

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी भाषा का साहित्यिक इतिहास अत्यंत समृद्ध और पुराना माना जाता है, लेकिन इसका लिखित रूप लंबे समय तक लोकगीतों, मौखिक परंपराओं और जनजीवन...

भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता का विरोध, संकीर्ण मानसिकता का परिचायक

संतोष पटेल, संस्थापक, भोजपुरी जनजागरण अभियान 'बोलियाँ को भाषा बनाने की जिद' शीर्षक आलेख में मुंम्बई विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ करुणाशंकर उपाध्याय ने भोजपुरी...

डॉ. सुधाकर तिवारी: भोजपुरी भाषा के ज्ञान, शोध और सम्मान की आवाज

Bhojpuri24.com की ‘भोजपुरी धुरंधर’ श्रृंखला में आज पढ़िए डॉ. सुधाकर तिवारी की कहानी। चार दर्जन से अधिक पुस्तकों और सौ से ज्यादा शोधपत्रों के...

खेतों से साहित्यिक मंच तक, भोजपुरी के लिए समर्पित एक नाम अश्विनी द्विवेदी ‘नमन’

भोजपुरी भाषा आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों की बोली है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी खड़ी हैं। एक ओर जहां भोजपुरी सिनेमा...

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भोजपुरी पाठकों के लिए अनमोल कृति है भोजपुरी में श्रीमद्भगवद् गीता

समीक्षक: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा श्रीमद् भगवद् गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा...

‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

‘ककहरा’ भोजपुरी काव्य की समकालीन समझ का सार्थक प्रयास

समीक्षक: डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी अपनी वाचिक परंपरा, लोकधर्मी...

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