जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, कविता-गीत से संपादन तक भोजपुरी साहित्य के साधक

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Bhojpuri24.com की विशेष शृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय भोजपुरी साहित्य के ऐसे बहुआयामी रचनाकार से, जिन्होंने कविता, गीत और व्यंग्य लेखन के साथ साहित्यिक संपादन के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। जयशंकर प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी काव्य और गीत संग्रहों के लेखक होने के साथ ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के संपादक और ‘सर्वभाषा’ पत्रिका के वेब संपादक भी हैं। उनका साहित्यिक सफर सृजन, संपादन और भोजपुरी भाषा-साहित्य के प्रचार-प्रसार के प्रति निरंतर समर्पण की कहानी है।

तकनीकी शिक्षा, लेकिन साहित्य से गहरा लगाव

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी का जन्म 10 नवंबर 1968 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के बरहुआं गांव में हुआ। उन्होंने बीएससी के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन में बीई की डिग्री प्राप्त की। पेशे से कंप्यूटर प्रोफेशनल रहे द्विवेदी ने तकनीकी क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए भी साहित्य से अपना रिश्ता बनाए रखा।

कविता, गीत और व्यंग्य लेखन के साथ साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के संपादन में उनकी सक्रियता ने उन्हें बहुआयामी रचनाकार के रूप में स्थापित किया। उनका सफर बताता है कि साहित्य के प्रति अनुराग किसी खास शैक्षणिक विषय या पेशे की सीमा में बंधा नहीं होता।

कविता और गीत से बनाई अलग पहचान

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी की प्रकाशित पुस्तकों में भोजपुरी काव्य संग्रह, गीत संग्रह और ललित व्यंग्य आलेख संग्रह शामिल हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘पीपर के पतई’ (2017), ‘जबरी पहुना भइल जिनगी’ (2018), ‘आचर आचर गीत’ (2020), ‘उतरत हरिनंदी के पीर’ (2021), ‘धक् से लागल बात बावरी’ (2022), ‘दियरिया जरत रहे’ (2024) और ‘देखत हँसे धतूरा’ (2025) शामिल हैं।

हिंदी साहित्य में भी उनकी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज है। उनका हिंदी काव्य संग्रह ‘सूत्रधार कौन’ वर्ष 2024 में प्रकाशित हुआ। इन कृतियों से उनके लेखन का विस्तार भोजपुरी कविता और गीत से लेकर व्यंग्य तथा हिंदी काव्य तक दिखाई देता है।

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‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के संपादक के रूप में निरंतर सक्रिय

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के साहित्यिक व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष संपादन है। वह अप्रैल 2016 से भोजपुरी की मासिक पत्रिका ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के संपादक हैं। वर्ष 2017 से त्रैमासिक पत्रिका ‘सर्वभाषा’ के वेब संपादक के रूप में भी सक्रिय हैं।

उनकी संपादकीय यात्रा कई दूसरी पत्रिकाओं से भी जुड़ी रही है। सितंबर 2016 से 2021 तक उन्होंने हिंदी मासिक पत्रिका ‘भोजपुरी संगम’ में सलाहकार संपादक की भूमिका निभाई। मार्च 2017 से सितंबर 2019 तक वह ‘भोजपुरी पंचायत’ के कार्यकारी संपादक रहे। जनवरी 2019 से त्रैमासिक हिंदी ई-पत्रिका ‘समग्र प्रवाह’ के कार्यकारी संपादक के रूप में भी जुड़े रहे।

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वर्ष 2021 से 2022 तक उन्होंने त्रैमासिक हिंदी ई-पत्रिका ‘द लेखक’ में साहित्य संपादक की जिम्मेदारी निभाई। अगस्त 2025 से वह यूट्यूब चैनल ‘भोजपुरी साहित्य : रचना आलोचना’ के संपादक और प्रस्तोता के रूप में सक्रिय हैं।

पत्रिकाओं और डिजिटल माध्यमों से उनका जुड़ाव भोजपुरी साहित्य की रचनाओं को पाठकों तक पहुंचाने और साहित्यिक विमर्श को आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों को रेखांकित करता है।

साहित्यिक संकलनों और पुस्तकों के संपादन में योगदान

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी की सक्रियता केवल अपनी पुस्तकें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है। वह विभिन्न हिंदी और भोजपुरी साहित्यिक संकलनों से भी जुड़े रहे हैं। ‘अनकहे जज्बात’, ‘मशाल’, ‘शब्दों की अदालत में’, ‘काव्यांजलि’, ‘भोजपत्र’ और ‘सृजक’ जैसे संकलनों में उनकी सहभागिता रही है। ‘कोरोना काल के भोजपुरी कविताई’ (2022) और ‘भोजपुरी प्रतिभाएं’ (2025) जैसे संकलनों में भी उनका योगदान दर्ज है।

भोजपुरी साहित्य में महिला रचनाकारों की भूमिका पर केंद्रित पुस्तकों के संपादन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2019 में ‘भोजपुरी साहित्य में महिला रचनाकारन के भूमिका’ का पहला भाग और 2020 में दूसरा भाग प्रकाशित हुआ।

इसके अलावा ‘इंद्रधनुषी काव्य व्यक्तित्व : आचार्य हरे राम त्रिपाठी चेतन’ (2021), ‘गीत मंजरी’ (2022) और ‘बरहुआं के परवा दुबे लोग’ (2023) के संपादन अथवा संपादकीय मंडल में भी उनकी भूमिका रही। उनके साहित्यिक परिचय के अनुसार, वह लगभग एक दर्जन पुस्तकों की भूमिकाएं भी लिख चुके हैं।

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यह पक्ष उन्हें एक ऐसे साहित्यकर्मी के रूप में सामने लाता है, जो अपने सृजन के साथ दूसरे रचनाकारों की पुस्तकों और साहित्यिक प्रयासों को भी आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं।

रेडियो से डिजिटल मंचों तक साहित्यिक उपस्थिति

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक जुड़ाव पुस्तकों और पत्रिकाओं से आगे रेडियो तथा डिजिटल मंचों तक फैला हुआ है। वह जुलाई 2018 से जनवरी 2019 तक गाजियाबाद के हिट्स रेडियो 90.4 एफएम के भोजपुरी कार्यक्रम से जुड़े रहे। जनवरी 2019 से जनवरी 2020 तक उन्होंने रूमी मीडिया वेब चैनल के भोजपुरी कार्यक्रम ‘बतकही’ में एंकरिंग की।

उनके साहित्यिक परिचय में ‘इंडिया वॉच’ पर लाइव भोजपुरी काव्यपाठ और मैथिली-भोजपुरी अकादमी के मंच से काव्यपाठ का उल्लेख है। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भोजपुरी अध्ययन केंद्र में वक्तव्य देने और साहित्यिक विमर्श में भाग लेने का अवसर भी प्राप्त किया।

देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके भोजपुरी गीत, कविताएं, लेख और व्यंग्य आलेख प्रकाशित हुए हैं। इन गतिविधियों से साहित्यिक सृजन के साथ संवाद और प्रस्तुति के प्रति उनकी रुचि भी सामने आती है।

साहित्यिक संगठनों में भी निभाई जिम्मेदारी

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी विभिन्न साहित्यिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं। वह विश्व भोजपुरी सम्मेलन की गाजियाबाद इकाई के महासचिव और अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन की दिल्ली इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वर्ष 2016 से मार्च 2019 तक संस्कार भारती की शास्त्री नगर इकाई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

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साहित्यिक संगठनों से जुड़ी उनकी भूमिका उनके व्यक्तित्व के उस पक्ष को सामने लाती है, जिसमें व्यक्तिगत लेखन और संपादन के साथ सामूहिक साहित्यिक गतिविधियों में भागीदारी भी शामिल है।

साहित्यिक योगदान के लिए मिले सम्मान

हिंदी और भोजपुरी साहित्य में योगदान के लिए जयशंकर प्रसाद द्विवेदी को विभिन्न संस्थाओं ने सम्मानित किया है। उनके साहित्यिक परिचय में दर्ज प्रमुख सम्मानों में शामिल हैं-

  • भोजपुरी भागीरथ सम्मान (2017): भोजपुरी संगम द्वारा।
  • सर्वभाषा सम्मान (2018): साहित्यिक योगदान के लिए।
  • भोजपुरी पत्रिका के कुशल संपादन हेतु सम्मान-पत्र (2019): विश्व भोजपुरी सम्मेलन द्वारा।
  • सर्वभाषा सेवा सम्मान (2019): साहित्यिक सेवा के लिए।
  • भोजपुरी रत्न सम्मान (2019): साहित्यिक योगदान के लिए।
  • भिखारी ठाकुर भोजपुरी सम्मान (2020): हिंदुस्तानी अकादमी, प्रयागराज द्वारा।
  • विद्यासागर सम्मान (2021): विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा।
  • भारत गौरव सम्मान (2022): विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा।
  • काव्य कौस्तुभ सम्मान (2022): साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा द्वारा।
  • पांडेय नववदेश्वर सहाय सम्मान (2023): अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन द्वारा।
  • चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह सृजन सम्मान (2026): सर्वभाषा ट्रस्ट और चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह संस्थान, आरा द्वारा।

इन सम्मानों के माध्यम से उनके साहित्यिक सृजन, संपादन और भोजपुरी भाषा-साहित्य से जुड़े कार्यों की पहचान विभिन्न मंचों पर बनी है।

क्यों हैं ‘भोजपुरी धुरंधर’?

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी की साहित्यिक यात्रा की विशेषता उनके कार्यों का व्यापक विस्तार है। एक ओर उनके भोजपुरी काव्य और गीत संग्रह हैं, तो दूसरी ओर व्यंग्य लेखन, हिंदी काव्य, पत्रिका संपादन और साहित्यिक संकलनों से जुड़ी गतिविधियां भी हैं।

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‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के संपादक के रूप में अप्रैल 2016 से उनकी निरंतर सक्रियता और ‘सर्वभाषा’ के वेब संपादक के रूप में उनकी भूमिका उनके साहित्यिक जीवन के महत्वपूर्ण पक्ष हैं। रेडियो, वेब चैनल, साहित्यिक संगठनों और विभिन्न संकलनों के माध्यम से भी वह भोजपुरी भाषा-साहित्य की गतिविधियों में भागीदारी करते रहे हैं।

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी को ‘भोजपुरी धुरंधर’ के रूप में प्रस्तुत करने का आधार उनका बहुआयामी साहित्यिक योगदान है—कविता और गीत का सृजन, व्यंग्य लेखन, पत्रिकाओं का संपादन और दूसरे रचनाकारों की पुस्तकों को साहित्यिक मंच उपलब्ध कराने का प्रयास। उनकी यात्रा यह रेखांकित करती है कि भाषा और साहित्य की सेवा केवल अपनी रचनाओं तक सीमित नहीं रहती; संपादन, संवाद, संकलन और साहित्यिक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी भी इस यात्रा के महत्वपूर्ण आयाम हैं।

भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े ऐसे ही रचनाकारों की यात्रा पढ़ने के लिए जुड़े रहिए Bhojpuri24.com की विशेष शृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ के साथ।

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