देवरिया में मोती बीए की 107वीं जयंती पर श्रद्धांजलि सभा, भोजपुरी के शब्द शिल्पी को किया गया याद

Date:

सलेमपुर (देवरिया)। प्रख्यात साहित्यकार, कवि, गीतकार और भोजपुरी भाषा के प्रतिष्ठित शब्द शिल्पी मोती बीए की 107वीं जयंती के अवसर पर सलेमपुर के मझौली राज स्थित भारत भवन पत्रकार निवास में श्रद्धांजलि एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार समन्वय समिति, सोशल मीडिया पत्रकार महासंघ के केंद्रीय कार्यालय तथा प्रगतिशील भोजपुरी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष एवं भोजपुरिया अमन के प्रधान संपादक के सौजन्य से किया गया। इस दौरान उपस्थित साहित्यकारों, पत्रकारों और समाजसेवियों ने मोती बीए के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन सिंह ने मोती बीए के जीवन से जुड़े कई प्रेरक और अनकहे प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1997 में आयोजित प्रगतिशील भोजपुरी समाज के जिला सम्मेलन में मोती बीए मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उस सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार पंडित सिंहासन तिवारी ‘कांत’ ने की थी। डॉ. सिंह ने कहा कि उस समय मोती बीए ने भोजपुरी समाज की चुनौतियों पर गंभीरता से चर्चा की थी और भाषा के विकास, साहित्य के विस्तार तथा सामाजिक जागरूकता के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार समन्वय समिति के राष्ट्रीय संयोजक सरदार दिलावर सिंह ने मोती बीए के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मोती बीए ने अपने साहित्य और गीतों के माध्यम से भोजपुरी भाषा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके लेखन में लोकजीवन, संस्कृति और समाज की संवेदनाएं सहज रूप से दिखाई देती हैं, जो आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं।

युवा पत्रकार हार्दिक पाण्डेय ने कहा कि मोती बीए ने भोजपुरी फिल्म जगत को ऐसे गीत दिए, जिन्होंने न केवल भोजपुरी सिनेमा को समृद्ध किया, बल्कि पूरे देश में भोजपुरी भाषा की लोकप्रियता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके गीतों ने भोजपुरी की मिठास और लोकसंस्कृति को जन-जन तक पहुंचाया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता जगदीश नारायण मिश्र ने भी मोती बीए के जीवन और उनके साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने लेखन से भोजपुरी भाषा को सम्मान और नई पहचान दिलाई।

कार्यक्रम में सरदार कोपेन्द्र सिंह, जवाहरलाल गुप्ता, विजय यादव, अमिय नाथ मिश्र, एस.एन. पाण्डेय, सौरभ पटेल सहित अनेक साहित्यप्रेमी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मोती बीए का साहित्य और उनका सांस्कृतिक योगदान भोजपुरी समाज की अमूल्य धरोहर है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

‘गंगा रतन बिदेसी’ भोजपुरी उपन्यास में प्रवासी जीवन की पीड़ा

समीक्षक: प्रकाश प्रियांशु भोजपुरी साहित्य धारा में उपन्यास विधा अपेक्षाकृत...

भोजपुरी में पढ़ाई जाएंगी कबीर की उलटबांसियां, नए सिलेबस में कबीर से पत्रकारिता तक

पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में भोजपुरी से स्नातक करने...

भोजपुरी बोलना शर्म नहीं, गर्व की बात है

भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं होती, वह किसी...