साहित्य

गिरमिटिया इतिहास के साक्षी और भोजपुरी-फिजी हिंदी संस्कृति के संरक्षक हैं राजेंद्र प्रसाद

न्यूजीलैंड/फिजी: फिजी के बा (Ba) क्षेत्र में जन्मे राजेंद्र प्रसाद आज इंडो-फिजियन डायस्पोरा के उन दुर्लभ आवाजों में से एक हैं, जो गिरमिटिया अतीत...

पीड़ा की विरह वेदना को अमर कर देता है बिरहा

वाराणसी के ठठेरी बाजार और चौखम्भा इलाके में श्रमिकों के बीच गया गया था पहला पटना/ गोरखपुर: रात का अंधेरा घना हो चुका है। कलकत्ता...

त्रेता युग से जुड़ा है चैता के तार

नई दिल्ली/पटना: भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में चैता (या चइता/चैती) सिर्फ एक मौसमी गीत नहीं बल्कि यह चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) की बसंत ऋतु, राम नवमी,...

भोजपुरी गद्य के स्तंभ हैं डॉ. विवेकी राय

पटना/वाराणसी : ग्रामीण जीवन की सच्ची तस्वीर, गांव की मिट्टी की महक और पूर्वांचल की पीड़ा को शब्दों में उतारने वाले साहित्यकार हैं डॉ....

सत्तू से बने व्यंजन, भोजपुरी-बिहारी संस्कृति का सुपरफूड

सत्तू (जिसे चने का सत्तू या भुना चना आटा भी कहते हैं) भोजपुरी क्षेत्र (बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड) का सबसे प्राचीन और शक्तिशाली...

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