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गुप्त काल में शुरू हुई थी भोजपुरी की अपनी लिखावट ‘कैथी’……. और फिर धीरे धीरे मर गई

लेख- बाबा भोजपुरिया पटना/गोरखपुर: कल्पना कीजिए, 19वीं सदी का बिहार का कोई जिला या पूर्वांचल हो। सरकारी दफ्तरों में, अदालतों में, किसानों के खेत-खलिहान...

भोजपुरी लोकनाट्य की अमर विरासत हैं भिखारी ठाकुर की रचनाएं

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी साहित्य और लोकनाट्य की दुनिया में भिखारी ठाकुर (18 दिसंबर 1887 – 10 जुलाई 1971) एक ऐसा नाम हैं, जिन्हें सम्मानपूर्वक 'भोजपुरी...

क्यों आज भी जीवंत है भिखारी ठाकुर की बिदेसिया शैली

पटना/गोरखपुर: सावन की रात। गांव के खुले मैदान में हजारों लोग जमा हैं। ढोलक की थाप, मंजीरा की छनकार और भिखारी ठाकुर की आवाज...

‘गीत गवाई’ की गूंज, सरिता बूधू ने कहा, भोजपुरी सिर्फ भाषा नहीं, सांस्कृतिक पहचान

कोलकाता। मॉरीशस की सांस्कृतिक विद्वान और विचारक सरिता बूधू बुधवार को कोलकाता में आयोजित ‘गीत गवाई’ कार्यक्रम में शामिल हुईं। भोजपुरी की यह पारंपरिक...

भोजपुरी लोकगीत: क्या अपने किसी सावन में कजरी सुना है?

पटना/गोरखपुर: सावन की पहली बारिश में खेतों के किनारे महिलाएं ढोलक थामे कजरी गा रही हैं कि 'सावन मास बहार आयल रे, मोरा कजरी...

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