भोजपुरी भवन के नाम वापस होखे, बलिया के भाषाई अस्मिता के सम्मान होखे

1

जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में भोजपुरी के साथ न्याय के मांग

बलिया। बलिया खाली उत्तर प्रदेश के एगो जिला ना ह, बल्कि भोजपुरी भाषा, लोकसंस्कृति आ जनचेतना के ऐतिहासिक धरती ह। अइसन क्षेत्र में स्थापित जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय से भोजपुरी समाज के ई स्वाभाविक अपेक्षा बा कि विश्वविद्यालय भोजपुरी भाषा, साहित्य आ संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन आ अध्ययन-अनुसंधान के प्रमुख केंद्र बने।

विश्वविद्यालय के अभिलेख में पहिले परिसर के एगो भवन के उल्लेख “हजारी प्रसाद अकादमिक (भोजपुरी भवन)” के रूप में मिलेला। बाद में एकर नाम बदल के “हजारी प्रसाद द्विवेदी अकादमी भवन” कर दिहल गइल। एह बदलाव के लेके भोजपुरी समाज में सवाल उठे लागल बा।

प्रगतिशील भोजपुरी समाज के कहना बा कि हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के साहित्यिक योगदान के पूरा सम्मान होखे के चाहीं, बाकिर कवनो महान साहित्यकार के सम्मान खातिर भोजपुरी जइसन व्यापक लोकभाषा के पहचान से जुड़ल भवन के नाम समाप्त करल उचित नइखे।

संगठन के कहना बा कि ई मुद्दा कवनो व्यक्ति, समुदाय भा जाति के खिलाफ नइखे। सवाल ई बा कि “भोजपुरी भवन” के नाम हटावे के औचित्य का रहल? साथही ई भी विचार के विषय बा कि बलिया विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय भाषाई आ सांस्कृतिक पहचान के अपेक्षित सम्मान मिल रहल बा कि ना।

बलिया के इतिहास में भोजपुरी के खास महत्व

बलिया के पहचान स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से भी गहिराई से जुड़ल बा। 19 अगस्त 1942 के बलिया में अंग्रेजी शासन के खिलाफ समानांतर राष्ट्रीय सरकार के स्थापना भइल रहे। चित्तू पांडेय के नेतृत्व में भइल ई आंदोलन बलिया के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में विशिष्ट स्थान दिहलस।

ये भी पढ़ें- भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में मिले स्थान, तो बदल सकती है करोड़ों लोगों की तकदीर

अइसन ऐतिहासिक धरती पर स्थित विश्वविद्यालय में भोजपुरी भाषा के अपेक्षित अकादमिक स्थान ना मिलल, एह बात के लेके भोजपुरी समाज गंभीर चिंता जतवले बा।

प्रगतिशील भोजपुरी समाज के प्रमुख मांग

प्रगतिशील भोजपुरी समाज विश्वविद्यालय आ शासन के सामने कई गो मांग रखले बा—

  1. “भोजपुरी भवन” नाम फेर से बहाल कइल जाव।
  2. हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के सम्मान में एगो अलग अकादमिक/साहित्यिक केंद्र स्थापित कइल जाव, ताकि साहित्यकार के सम्मान भी होखे आ भोजपुरी के पहचान भी सुरक्षित रहे।
  3. जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में स्वतंत्र “भोजपुरी अध्ययन केंद्र/विभाग” स्थापित कइल जाव।
  4. भोजपुरी भाषा आ साहित्य में स्नातक, परास्नातक आ शोध के समुचित व्यवस्था विकसित कइल जाव।
  5. भोजपुरी लोकगीत, लोककथा, लोकनाट्य, लोकइतिहास आ मौखिक परंपरा के संरक्षण खातिर डिजिटल अभिलेखागार बनावल जाव।
  6. विश्वविद्यालय के भोजपुरी भाषा-साहित्य आ संस्कृति के राष्ट्रीय स्तर के अध्ययन-अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित कइल जाव।
  7. भवन के नाम बदले के प्रक्रिया आ एह निर्णय के प्रशासनिक आधार सार्वजनिक कइल जाव।

राज्यपाल से हस्तक्षेप के मांग

प्रगतिशील भोजपुरी समाज उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति से एह मामिला में हस्तक्षेप करे के मांग कइले बा। संगठन के कहना बा कि भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के सम्मान से जुड़ल एह मुद्दा पर विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जानकारी लेके उचित कार्रवाई कइल जाव।

ये भी पढ़ें-बिरहा-बगान : विलुप्त होत भोजपुरी बिरहा परंपरा के फेरु से स्वर देवे के एगो सार्थक कोशिश

भोजपुरी समाज के कहना बा कि भोजपुरी भवन के नाम बहाल कइल खाली एगो भवन के नाम वापस करे के सवाल नइखे, बल्कि बलिया के भाषाई, सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक अस्मिता के सम्मान के सवाल बा। साथही हजारी प्रसाद द्विवेदी जइसन महान साहित्यकार के सम्मान में अलग अकादमिक केंद्र बनावल जाव, जे भोजपुरी आ हिंदी दुनु साहित्यिक परंपरा के मजबूत करे में योगदान दे सकेला।

1 COMMENT

  1. चंद्रशेखर जी प्रायः भोजपुरी में बतिआवत रहीं । अपना समय में युवा तुर्क के रूप में बड़ा सोहरत रहे। हमनी सरधा से उहाँ के देखत रहीं ।
    बाकिर जब भोजपुरी के मान्यता के प्रस्ताव संसद में आइल त उहाँ का खुलेआम विरोध कइनी। तहिये से हमार व्यक्तिगत सरधा भाव खतम हो गइल। खाँटी भोजपुरिया स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पाण्डेय जी के स्मारक पर उहाँ का कहियो फूल ना चढ़वले होखब। उहाँ के नाम पर जवन विश्वविद्यालय बा ओह से अगर भोजपुरी शब्द हटा दिआइल बा। ई ना होखे कि कहियो हजारियो बाबा के नाम गायब मिले। सोचे के बलिया के जनता के बा कि ओकरा मातृभाषा आ कृती व्यक्तित्व लोग के साथ कब तक इहे चली।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here