आरा: भोजपुरी लोककला और संस्कृति के संरक्षण को लेकर आरा में चार दिवसीय ‘लोकरस रंग-सह-सम्मान समारोह-2026’ का आयोजन किया जाएगा। लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की जयंती के अवसर पर प्रस्तावित यह समारोह 15 से 18 दिसंबर तक पटेल बस पड़ाव स्थित भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर होगा। आयोजन भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के रजत जयंती वर्ष के तहत किया जा रहा है।
भोजपुरी संस्कृति और मातृभाषा के संरक्षण पर जोर
आयोजन की तैयारियों को लेकर भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर बैठक हुई। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, स्मारिका प्रकाशन, नाटक मंचन और कलाकारों के चयन सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। आयोजन सचिव डॉ. रवि प्रकाश सूरज ने कार्यक्रम की जानकारी दी।
संस्थान के अनुसार समारोह का प्रमुख उद्देश्य विलुप्त होती भोजपुरी संस्कृति, लोक परंपराओं और मातृभाषा को संरक्षित करना है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भोजपुरी लोककला और भिखारी ठाकुर की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
भिखारी ठाकुर और ‘लोहा सिंह’ के नाटक होंगे मंचित
समारोह के दौरान भिखारी ठाकुर के नाटकों और ‘लोहा सिंह’ के मंचन की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए कलाकारों का चयन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर बिहार के साथ-साथ झारखंड और उत्तर प्रदेश से भी रचनात्मक सामग्री प्राप्त हुई है।
स्मारिका का होगा प्रकाशन
समारोह के अवसर पर एक स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी। इसके लिए बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आलेख प्राप्त हुए हैं। स्मारिका में भोजपुरी भाषा, लोकसंस्कृति और भिखारी ठाकुर के योगदान से जुड़े लेखों को शामिल किया जाएगा। बैठक से पहले भिखारी ठाकुर, बाबू लल्लन जी और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण भी किया गया।
क्यों महत्वपूर्ण हैं भिखारी ठाकुर?
भिखारी ठाकुर को भोजपुरी लोकनाट्य और लोकसंस्कृति की महत्वपूर्ण हस्तियों में गिना जाता है। उनके नाटकों और गीतों में ग्रामीण समाज, सामाजिक समस्याओं, प्रवासन और पारिवारिक जीवन के विभिन्न पहलुओं की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। ऐसे में उनके नाम से होने वाला यह आयोजन भोजपुरी की लोक विरासत को मंच देने का प्रयास है।




