बाबा भोजपुरिया

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पत्रकारिता में करीब 20 वर्षों का अनुभव है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। भोजपुरी संस्कृति, भाषा, खानपान, पहनावे और लोकगीतों के संरक्षण व संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।

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सतुआन: परंपरा, प्रकृति और स्वास्थ्य का लोकपर्व

सतुआन आज, पूर्वांचाल, बिहार, झारखण्ड, नेपाल, मॉरीशस, फिजी में भी मनाया जा रहा है पटना/ गोरखपुर: सतुआन, जिसे सतुआनी या सत्तूआन भी कहा जाता है,...

मिट्टी की दीवारों से दुनिया तक मधुबनी पेंटिंग का रंगीन सफर

मिथिला की परंपरा, महिलाओं की ताकत और करोड़ों का वैश्विक कारोबार मिथिला: मधुबनी पेंटिंग की उत्पत्ति मिथिला क्षेत्र से मानी जाती है। लोकमान्यताओं के अनुसार,...

कंधों पर सभ्यता, पूर्वांचल-बिहार में कहारों की परंपरा, इतिहास और विलुप्त होती विरासत

‘डोली’ को देवी स्वरूप माना जाता था और उसे उठाने वाले कहारों को भी शुभ कार्य का सहभागी समझा जाता था। यह कहानी सिर्फ कहारों...

परंपरा और पर्व का अनोखा संगम चिक्का, परंपरा अब यादों में सिमटती हुई

गोरखपुर: पूर्वांचल के गांवों में नाग पंचमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि लोकजीवन के उत्सव का प्रतीक हुआ करता था। इस दिन...

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चोला में भोला मिलते, शिवमय भइल संसार: कनक किशोर

चतुर्मास विशेष आज बात बतकही में केहू सावन में त...

लोकजीवन के कवि डॉ. कमलेश राय, जिन्होंने भोजपुरी को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया

Bhojpuri24.com की विशेष श्रृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय...

लोकगीतों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली बिहार कोकिला विंध्यवासिनी देवी

पल्लवी कश्यप की रिपोर्ट Bhojpuri24.com की ‘भोजपुरी पुरोधा’ श्रृंखला...

वह विद्वान जिसने भोजपुरी को शोध और विमर्श के केंद्र में स्थापित किया

Bhojpuri24.com की विशेष श्रृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय...
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