बाबा भोजपुरिया

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पत्रकारिता में करीब 20 वर्षों का अनुभव है। भोजपुरी भाषा और संस्कृति को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। भोजपुरी संस्कृति, भाषा, खानपान, पहनावे और लोकगीतों के संरक्षण व संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।

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हिंदी सिनेमा की चमक और भोजपुरी की पहली सुपरस्टार थीं कुमकुम

पटना: 1950-60 के दशक में जब हिंदी सिनेमा अपने स्वर्णिम दौर में था, उसी समय कुमकुम ने अपनी अलग पहचान बनाई। वे मुख्य नायिका...

नहीं रोके तो…. एक दिन भोजपुरी सिर्फ ‘अश्लील’ का पर्याय रह जाएगी

इस आलेख से समझिए कि किस तरह अश्लीलता अकेले ही भोजपुरी संस्कृति को खत्म कर रही है। भोजपुरी कभी सिर्फ एक भाषा नहीं थी, यह...

हंसी, तंज और लोकजीवन की अनोखी अभिव्यक्ति है जोगीरा

जोगीरा सा रा रा रा... जोगीरा सा रा रा रा... यह आवाज सुनते ही होली का रंग और जोश दोगुना हो जाता है। उत्तर...

भोजपुरी के शब्द बोलकर वोट लेने वाले क्यों नहीं लड़ते भोजपुरी की लड़ाई ?

चुनावी मौसम आते ही एक परिचित दृश्य सामने आता है नेता मंच पर चढ़ते हैं, 'का हाल बा, गोड़ लागत बानी, रउआ सब ठीक...

‘गांव की भाषा’ मानकर हीन भावना से जुड़ेंगे तो खत्म हो जाएगी भोजपुरी

भोजपुरी के अस्तित्व का सवाल है भाषा और बोली की शुद्धता में गिरावट भोजपुरी की असली ताकत उसकी सादगी और आत्मीयता में है और यही...

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चोला में भोला मिलते, शिवमय भइल संसार: कनक किशोर

चतुर्मास विशेष आज बात बतकही में केहू सावन में त...

लोकजीवन के कवि डॉ. कमलेश राय, जिन्होंने भोजपुरी को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया

Bhojpuri24.com की विशेष श्रृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय...

लोकगीतों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली बिहार कोकिला विंध्यवासिनी देवी

पल्लवी कश्यप की रिपोर्ट Bhojpuri24.com की ‘भोजपुरी पुरोधा’ श्रृंखला...

वह विद्वान जिसने भोजपुरी को शोध और विमर्श के केंद्र में स्थापित किया

Bhojpuri24.com की विशेष श्रृंखला ‘भोजपुरी धुरंधर’ में आज परिचय...
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