सूरीनाम हेरिटेज फेस्टिवल में गूंजे भोजपुरी लोकगीत, कजरी और विवाह गीतों ने बांधा समां

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वाराणसी। दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में आयोजित सूरीनाम हेरिटेज फेस्टिवल में भोजपुरी लोकगीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के तत्वावधान में वाराणसी से गया 10 सदस्यीय सांस्कृतिक दल पांच दिवसीय दौरे पर सूरीनाम पहुंचा, जहां कलाकारों ने भारतीय लोक संस्कृति और भोजपुरी परंपरा के रंग बिखेरे।

कजरी, सोहर और विवाह गीतों से झूमे दर्शक

कार्यक्रम में मुख्य गायिका सरोज वर्मा ने कजरी, सोहर, विवाह गीत और भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी। भोजपुरी लोकगीतों के जरिए भारतीय जीवन, संस्कार और लोक परंपराओं की झलक पेश की गई।

संगीत प्रस्तुति में ढोलक पर सुभाष कन्नौजिया, तबला पर सौरभ मिश्र, बांसुरी पर प्रत्यूष मेहता, हारमोनियम पर नागेंद्र शर्मा और कीबोर्ड पर राम आश्रय मौर्य ने संगत की। वहीं वर्तिका वर्मा, कार्तिकी वर्मा, शुभांगी शर्मा और अंबिका तिवारी ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में हिस्सा लिया।

पांच दिनों में कई स्थानों पर कार्यक्रम

सांस्कृतिक दल ने सूरीनाम प्रवास के दौरान पाम गार्डन, माता गौरी परिसर, निकेरी और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र में प्रस्तुतियां दीं। स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र में विशेष कार्यशाला का भी आयोजन हुआ, जिसमें भारतीय लोककलाओं, संस्कारों और सामाजिक जीवन में लोक परंपराओं के महत्व पर चर्चा की गई।

सूरीनाम में भोजपुरी की सांस्कृतिक गूंज

यात्रा के दौरान भारतीय दूतावास में सांस्कृतिक दल का स्वागत भी किया गया। निकेरी में कलाकारों के लिए पारंपरिक अंदाज में कमल के पत्ते पर कढ़ी-चावल, दाल-पराठा और बैंगन का भरता परोसा गया।

सूरीनाम की धरती पर भोजपुरी गीतों और लोकनृत्य की यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही। इसने भोजपुरी भाषा, लोकगीत, संस्कार और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के बीच प्रवासी समाज के जुड़ाव को भी सामने रखा।

हजारों किलोमीटर दूर भोजपुरी लोकगीतों की गूंज यह बताती है कि भाषा और लोक संस्कृति की जड़ें सिर्फ अपनी भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं होतीं। प्रवासी समाज के बीच आज भी भोजपुरी के गीत और संस्कार अपनी पहचान बनाए हुए हैं।

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