भोजपुरी गीतों में अश्लीलता पर खुशी कक्कड़ की दो टूक, कहा-गीत ऐसे हों जिन्हें परिवार के साथ सुना जा सके

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मुजफ्फरपुर। भोजपुरी गीत-संगीत में बढ़ती अश्लीलता को लेकर लोकगायिका खुशी कक्कड़ ने स्पष्ट राय रखी है। उनका कहना है कि भोजपुरी गीत ऐसे होने चाहिए जिन्हें परिवार के साथ बैठकर सुना जा सके। भोजपुरी गीतों की भाषा और प्रस्तुति में मर्यादा तथा स्तर बनाए रखना जरूरी है।

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खुशी कक्कड़ की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब भोजपुरी संगीत में अश्लीलता को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। भोजपुरी गीतों की लोकप्रियता व्यापक है, लेकिन गीतों की विषयवस्तु, भाषा और प्रस्तुति को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे में कलाकारों की जिम्मेदारी और भोजपुरी संगीत के स्तर को लेकर बहस महत्वपूर्ण हो जाती है।

भोजपुरी की पहचान को मजबूत करने की जरूरत

भोजपुरी केवल मनोरंजन की भाषा नहीं, बल्कि समृद्ध लोकसंस्कृति, लोकगीत और सामाजिक जीवन से जुड़ी भाषा है। इसलिए भोजपुरी गीतों में भाषा की मिठास, लोकजीवन और सांस्कृतिक मूल्यों को जगह मिलनी चाहिए।

खुशी कक्कड़ का बयान इसी दिशा में भोजपुरी संगीत के लिए बेहतर मानक की जरूरत को सामने रखता है। उनका जोर ऐसे गीतों पर है, जिन्हें श्रोता सहजता से सुन सकें और जिनकी प्रस्तुति भोजपुरी की पहचान को मजबूत करे।

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लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

भोजपुरी संगीत का बड़ा दर्शक और श्रोता वर्ग है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने भोजपुरी गीतों को देश-विदेश तक पहुंचाया है। ऐसे में कलाकारों और गीतकारों के सामने लोकप्रियता के साथ भाषा और संस्कृति की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।

खुशी कक्कड़ की टिप्पणी भोजपुरी संगीत में अश्लीलता बनाम गुणवत्तापूर्ण और पारिवारिक गीतों की बहस को फिर सामने लाती है। भोजपुरी गीतों की लोकप्रियता को उसकी सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक विविधता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

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