नई दिल्ली। भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुलंद हुई। रविवार को भोजपुरी जन जागरण अभियान के बैनर तले आयोजित 28वें विशाल शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से आए भोजपुरी साहित्यकारों, समाजसेवियों, कलाकारों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और भाषा प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग को केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाना था। इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को ज्ञापन दिया गया।
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धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर भोजपुरी के समर्थन में जोरदार नारे लगाए। पूरे कार्यक्रम में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखी गई। आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि भोजपुरी करोड़ों लोगों की मातृभाषा है। इसका समृद्ध साहित्य, लोकसंस्कृति, लोकगीत, रंगमंच और सिनेमा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक इसे संविधान की अष्टम अनुसूची में स्थान नहीं मिल सका है।

भोजपुरी जन जागरण अभियान के संयोजक संतोष पटेल ने कहा कि वर्षों से भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष जारी है। अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार करोड़ों भोजपुरी भाषियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस मांग पर सकारात्मक निर्णय ले। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मान्यता मिलने से भोजपुरी भाषा के संरक्षण, शिक्षा, शोध, साहित्य और सरकारी स्तर पर इसके विकास को नई दिशा मिलेगी।

धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता प्रयागराज स्थित माई संस्था के संस्थापक एवं हर भोजपुरी संगम के अध्यक्ष अजीत सिंह ने की। उन्होंने कहा कि भोजपुरी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान और विरासत है। इसके सम्मान के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।

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धरना-स्थल पर “भीख नहीं चाहिए, कर्ज नहीं चाहिए, भोजपुरी का दर्जा चाहिए”, “एक भाषा, एक पहचान, एक अधिकार” और “भोजपुरी हमारी शान, हमारी पहचान” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि यह केवल भाषा का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और स्वाभिमान का भी प्रश्न है।
भोजपुरी जन जागरण अभियान के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक भोजपुरी को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल नहीं किया जाता, तब तक यह जनआंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में देश के विभिन्न राज्यों में जनजागरण अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ सकें।
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धरना-प्रदर्शन के समापन पर आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भोजपुरी भाषा के प्रति करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इसे शीघ्र संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल किया जाए। साथ ही सभी भोजपुरी भाषियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने और भाषा के सम्मान के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया गया।
धरना-प्रदर्शन में मनोज कुमार सिंह, धनंजय कुमार, डॉ. पुष्कर, डॉ. आलोक पांडेय, मोहन गुप्ता, रितेश राणा, सी.के. भट्ट, अधिवक्ता आर्यन, अजीत तथा रंगश्री संस्था के संस्थापक महेंद्र प्रताप सिंह सहित अनेक सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

