Tag: भोजपुरी साहित्य

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‘फगुआ के पहरा’ भोजपुरी कविता में लोकसंवेदना और प्रयोग का विस्तार

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी साहित्य में ऐसी कृतियों का विशेष महत्त्व है, जिनमें लोकजीवन की सहजता के साथ समय और समाज की...

‘भोजपुरिया बवाल’ और भोजपुरी की छवि, नाम-भाषा और पहचान पर उठे सवाल

विनोद अनुपम, वरिष्ठ फिल्म समीक्षक बिहार के मुख्यमंत्री किसी भी मंच पर आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं। किसी कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति तय करने के...

भाषा, बाज़ार और अश्लीलता: भोजपुरी ही क्यों गुनहगार?

संतोष पटेल आधुनिक जनसंचार माध्यमों, सोशल मीडिया और डिजिटल एल्गोरिदम के इस युग में किसी संस्कृति या भाषा को बहुत जल्दी किसी एक कटघरे में...

भोजपुरी फिल्मों के गानों से अलग है ‘बिदेसिया’, इसमें बसता है पति-पत्नी के विरह और समाज की पीड़ा का दर्द

पटना। भोजपुरी संस्कृति की पहचान सिर्फ लोकगीतों और फिल्मों के गानों तक सीमित नहीं है। भोजपुरी लोकनाट्य की समृद्ध परंपरा में ‘बिदेसिया’ एक ऐसी...

भोजपुरी में डायस्पोरा स्टडीज का पहला नाटक : ‘गिरमिटिया भारतवंशी’

समीक्षक: डॉ. संतोष पटेल सन् 1980 के बाद ‘डायस्पोरा’ (Diaspora) शब्द शिक्षा, साहित्य और सार्वजनिक विमर्श के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में...

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डॉ. संतोष पटेल: भोजपुरी खातिर संघर्षरत एगो मजबूत आवाज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर आज चर्चा अइसन व्यक्तित्व के, जवन भोजपुरी...

भोजपुरी-हिंदी के सशक्त नवगीतकार भगवती प्रसाद द्विवेदी

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल गीत भारतीय काव्य-परंपरा की सर्वाधिक प्राचीन...

भोजपुरी के सोहर में आजो जनमेलन बनवारी, नंद के लाला से मन के कन्हैया तक

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी कुछ दृश्य उम्र के साथ धुँधले...

भोजपुरी के हक पर संसद का ‘मानदंड’ वाला अड़ंगा, मान्यता के लिए लड़ाई जारी रहेगी

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने...

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