Tag: भोजपुरी पुस्तक समीक्षा

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पुस्तक समीक्षा : भोजपुरी भाषा-साहित्य के इतिहास का प्रामाणिक दस्तावेज है ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास’

समीक्षक : डॉ. लारी आज़ाद भोजपुरी भाषा और साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास’ की चर्चा विशेष रूप से प्रासंगिक है।...

लोकजीवन, लोकसंवेदना और बदलते गाँव की पीड़ा का काव्य-दस्तावेज : ‘नेह के थुन्हीं-टाटी हऽ गाँव’

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी साहित्य भारतीय लोकजीवन की सांस्कृतिक स्मृतियों, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त साहित्य है। इसकी रचनात्मक परंपरा...

भोजपुरिया जिनगी के सुख-दुख के मार्मिक आख्यान बा ‘झनकि बाजे हो

कनक किशोर सरल व्यक्तित्व के स्वामी बड़का आ गंभीर बात के बड़ा सहज ढंग से एह तरे सामने रखेला कि ऊ अपना जइसन, अपना जोरे...

अल्ट्रासोनोग्राफी : भोजपुरी कविता में स्त्री चेतना और सामाजिक यथार्थ का सशक्त दस्तावेज

'किसी का सत्य था, मैंने संदर्भ में जोड़ दिया। कोई मधुकोष काट लाया था, मैंने निचोड़ लिया। यो मैं कवि हूँ, आधुनिक हूँ, नया हूँ, काव्य-तत्त्व की खोज में...

‘देखावा के जिनगी’ में महकत बा भोजपुरी माटी के सोंध

राम नाथ बेख़बर (वरिष्ठ साहित्यकार) भोजपुरी ग़ज़ल के युवा हस्ताक्षर नूरैन अंसारी कवनो परिचय के मोहताज नइखीं। इहां के भोजपुरी के एगो बहुत समर्थ कवि...

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भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता की मांग को मिला नया आधार, केंद्रीय मंत्री ने किया उल्लेख

गजेंद्र सिंह शेखावत ने भोजपुरी की वैश्विक पहचान का...

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