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1728 की ‘बारह मासी’ से शुरू हुई थी भोजपुरी साहित्य की शुरुआती लिखित परंपरा

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी भाषा का साहित्यिक इतिहास अत्यंत समृद्ध और पुराना माना जाता है, लेकिन इसका लिखित रूप लंबे समय तक लोकगीतों, मौखिक परंपराओं और जनजीवन...

भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता का विरोध, संकीर्ण मानसिकता का परिचायक

संतोष पटेल, संस्थापक, भोजपुरी जनजागरण अभियान 'बोलियाँ को भाषा बनाने की जिद' शीर्षक आलेख में मुंम्बई विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ करुणाशंकर उपाध्याय ने भोजपुरी...

भोजपुरी को लोकभाषा से अकादमिक भाषा के रूप में स्थापित करने वाले डॉ. उदय नारायण तिवारी

Bhojpuri24.com के जयंती विशेष में आज आप पढ़ रहे हैं डॉ. उदय नारायण तिवारी बारे में। उनका सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि उन्होंने...

भोजपुरी हास्य-व्यंग्य को नई पहचान देने वाले ‘चतुरी चाचा’ आज भी हैं प्रासंगिक

डॉ. मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' जयंती विशेष- 1 जुलाई 1927  भोजपुरी भाषा और साहित्य के इतिहास में डॉ. मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' का नाम अत्यंत सम्मान और...

प्रवास में रहकर भोजपुरी अस्मिता की मशाल जलाने वाले शम्स जमील

Bhojpuri24.com के भोजपुरी नवकी पीढ़ी सीरीज में आज आप पढ़ रहे हैं शम्स जमील के बारे में। शम्स जमील का मानना है कि मातृभाषा...

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‘बिगुल’ का पराग पर एकाग्र विशेषांक, भोजपुरी साहित्य के एक मनीषी का सार्थक पुनर्पाठ

समीक्षक : डॉ. सुनील कुमार पाठक साहित्यिक पत्रिकाओं के लगातार...

भोजपुरी पाठकों के लिए अनमोल कृति है भोजपुरी में श्रीमद्भगवद् गीता

समीक्षक: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा श्रीमद् भगवद् गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा...

‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

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