Tag: भोजपुरी साहित्य समीक्षा

Browse our exclusive articles!

Now Is the Time to Think About Your Small-Business Success

Find people with high expectations and a low tolerance...

‘एकलव्य’ :गुरु-शिष्य परंपरा, सामाजिक समरसता और दलित चेतना का विशेष काव्य दस्तावेज

हालिया सन्दर्भ: प्रसिद्ध पब्लिशिंग हाउस ‘सेज’ (SAGE) से डॉ. गोरख प्रसाद ‘मस्ताना’ की पुस्तक ‘एकलव्य’ पर आधारित डॉ. दीपक कश्यप का शोध-आलेख ‘Sociology of...

भोजपुरी कविता की संवेदना, सौंदर्यशीलता और आलोचना-दृष्टि का प्रामाणिक दस्तावेज है -‘भोजपुरी कविता : रुचि आ रचाव’

समीक्षक : सूर्यदेव पाठक 'पराग' भोजपुरी साहित्य में सृजनात्मक विधाओं के समानान्तर आलोचना और समीक्षा- लेखन की परंपरा अपेक्षाकृत कम विकसित रही है। ऐसे समय...

Popular

भोजपुरी पाठकों के लिए अनमोल कृति है भोजपुरी में श्रीमद्भगवद् गीता

समीक्षक: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा श्रीमद् भगवद् गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा...

‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

‘ककहरा’ भोजपुरी काव्य की समकालीन समझ का सार्थक प्रयास

समीक्षक: डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी अपनी वाचिक परंपरा, लोकधर्मी...

Subscribe

spot_imgspot_img