Tag: भोजपुरी साहित्य समीक्षा

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‘भोजपुरी के मान्यता देईं, ए सरकार’ : भाषा-अस्मिता, लोकचेतना और जनआंदोलन का काव्यात्मक दस्तावेज

समीक्षक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी की मान्यता की मांग को कविता का जनस्वर बनाता संग्रह भोजपुरी भाषा की संवैधानिक मान्यता का सवाल केवल भाषा...

‘फूलवा’ सामाजिक यथार्थवाद, नागरिकता संकट और लैंगिक विमर्श

डॉ. संतोष पटेल भोजपुरी कथा-साहित्य की परंपरा में नेपाल के तराई (मधेश) क्षेत्र से उभरने वाली कृतियाँ न केवल अपनी भाषाई सोंधापन के लिए जानी...

पीड़ा, प्रश्न और प्रतिकार के स्वर से भोजपुरी को ताकतवर बनाती बलभद्र की समीक्षा

समीक्षक: डॉ. सुनील कुमार पाठक भोजपुरी के प्रख्यात रचनाकार बलभद्र के समालोचनात्मक आलेखों का संग्रह ‘भोजपुरी साहित्य : देश के देस का’ सर्वभाषा ट्रस्ट, नई...

पुस्तक समीक्षा: मूक क्रंदन की आवाज ‘अनबोलता’

भोजपुरी काव्य संग्रह: अनबोलता रचनाकार: डॉ. संतोष पटेल समीक्षक: डॉ. पुष्कर कुमार साहित्य केवल व्यक्तिगत भावनाओं और दुःखों की अभिव्यक्ति नहीं होता, बल्कि यह समाज के हाशिए...

जिंदगी के रंग से सराबोर जौहर का ‘रंगमहल’

समीक्षक : कनक किशोर भोजपुरी ग़ज़ल की दुनिया में सूफी संत जौहर शाफियाबादी एक नामचीन ग़ज़लकार के रूप में अपनी अलग पहचान रखते हैं। भोजपुरी...

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भोजपुरी पाठकों के लिए अनमोल कृति है भोजपुरी में श्रीमद्भगवद् गीता

समीक्षक: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा श्रीमद् भगवद् गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा...

‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

‘ककहरा’ भोजपुरी काव्य की समकालीन समझ का सार्थक प्रयास

समीक्षक: डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी अपनी वाचिक परंपरा, लोकधर्मी...

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