Tag: भोजपुरी संस्कृति

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माटी के गंध, गाँव के पीड़ा आ लोकजीवन के सुर हऽ ‘चलऽ चलीं गँउवाँ के ओर’

समीक्षक: राजेश भोजपुरिया भोजपुरी साहित्य के समृद्ध परंपरा में गीत विधा के अपना एगो विशिष्ट स्थान बा। लोकजीवन, माटी के गंध, रिश्तन के आत्मीयता, प्रकृति...

भोजपुरी लोक की वह बात, जो रहीम भी जानते थे और दोहे में कह गए

-डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी भोजपुरी साहित्य की असल शक्ति या ताकत या विशिष्टता क्या है? उसकी लोक-स्मृति। उसकी जड़ें लोक जीवन में हैं, जो पीढ़ियों...

‘माटी-पानी’ भोजपुरी अस्मिता, लोक-संस्कृति आ जीवन-बोध के जीवंत दस्तावेज

डॉ. संतोष पटेल पेशा से पत्रकार आ हृदय से लेखक भाई रितेश त्रिपाठी के निबंध संग्रह ‘माटी-पानी’ भोजपुरी वाङ्मय के एगो अनमोल धरोहर बा। ई...

भोजपुरी की उपेक्षा और राजनीति का दोहरा चरित्र

डॉ. संतोष पटेल भारत का बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी ढांचा हमेशा से देश की विविधता और ताकत का प्रतीक रहा है। लेकिन हालिया नीतिगत फैसलों और...

‘डुबि गइल गाँव-घर-बधार…’ बाढ़ की त्रासदी और किसान के दर्द का मर्मस्पर्शी दस्तावेज

राजेश भोजपुरिया, जमशेदपुर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व पत्रकार दिनेश्वर प्रसाद सिंह ‘दिनेश’ द्वारा रचित गीत ‘डुबि गइल गाँव-घर-बधार’ बाढ़ की विभीषिका और उससे तबाह होते...

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जौहर से ‘सूफ़ी रत्न’ तक, दीवारों के पार, रूह की आवाज़

डॉ. जौहर शफ़ियाबादी के साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान पर...

भोजपुरी की संवैधानिक मान्यता की मांग को मिला नया आधार, केंद्रीय मंत्री ने किया उल्लेख

गजेंद्र सिंह शेखावत ने भोजपुरी की वैश्विक पहचान का...

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