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अपना पूरा जीवन भोजपुरी भाषा के नाम कर दिया ऐसे हैं डॉ. जनार्दन सिंह

Bhojpuri24.com की ‘भोजपुरी धुरंधर’ श्रृंखला में आज पढ़िए ऐसे कर्मयोगी की कहानी, जिन्होंने साहित्य, पत्रकारिता, समाज सेवा और जनआंदोलन को भोजपुरी भाषा के सम्मान...

1728 की ‘बारह मासी’ से शुरू हुई थी भोजपुरी साहित्य की शुरुआती लिखित परंपरा

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी भाषा का साहित्यिक इतिहास अत्यंत समृद्ध और पुराना माना जाता है, लेकिन इसका लिखित रूप लंबे समय तक लोकगीतों, मौखिक परंपराओं और जनजीवन...

भोजपुरी हास्य-व्यंग्य को नई पहचान देने वाले ‘चतुरी चाचा’ आज भी हैं प्रासंगिक

डॉ. मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' जयंती विशेष- 1 जुलाई 1927  भोजपुरी भाषा और साहित्य के इतिहास में डॉ. मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' का नाम अत्यंत सम्मान और...

कबीरा आप ठगाइए और न ठगिए कोय -चंद्रेश्वर

भोजपुरी दिवस आ कबीर जयंती पर विशेष कबीर के हम किशोरावस्था से सुनत-पढ़त आ गुनत आ रहल बानी। धीरे-धीरे ऊ हमार चेतना के किछु हद...

भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता से पहिले, भोजपुरी में जिए के जरूरत बा

नबीन कुमार एक हाली रउवा अपना छाती (करेजा/दिल) प हाथ ध के आंख मुदि के सोची कि आज ग्रियर्सन जदि रहिते आ भोजपुरी भाषा वाला...

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