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Exclusive articles:

भोजपुरियों का परदेस में पसीना से देश में समृद्धि 2 लाख करोड़ से अधिक की तरक्की

नई दिल्ली/पटना: भोजपुरी भाषी क्षेत्र (पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और झारखंड के कुछ हिस्से) से निकले प्रवासी न केवल अपनी संस्कृति और भाषा...

लौंडा नाच 11वीं सदी में शुरू हुआ था, भिखारी ठाकुर ने पहुँचाया था जन जन तक

पटना/गोरखपुर: सावन की रात, गांव के खुले मैदान में ढोलक की थाप, मंजीरा की छनकार और रंग-बिरंगे लहंगे में सजे युवक… 'बिदेसिया बाबा, हमार...

गुप्त काल में शुरू हुई थी भोजपुरी की अपनी लिखावट ‘कैथी’……. और फिर धीरे धीरे मर गई

लेख- बाबा भोजपुरिया पटना/गोरखपुर: कल्पना कीजिए, 19वीं सदी का बिहार का कोई जिला या पूर्वांचल हो। सरकारी दफ्तरों में, अदालतों में, किसानों के खेत-खलिहान...

भोजपुरी लोकनाट्य की अमर विरासत हैं भिखारी ठाकुर की रचनाएं

पटना/गोरखपुर: भोजपुरी साहित्य और लोकनाट्य की दुनिया में भिखारी ठाकुर (18 दिसंबर 1887 – 10 जुलाई 1971) एक ऐसा नाम हैं, जिन्हें सम्मानपूर्वक 'भोजपुरी...

क्यों आज भी जीवंत है भिखारी ठाकुर की बिदेसिया शैली

पटना/गोरखपुर: सावन की रात। गांव के खुले मैदान में हजारों लोग जमा हैं। ढोलक की थाप, मंजीरा की छनकार और भिखारी ठाकुर की आवाज...

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भोजपुरी पाठकों के लिए अनमोल कृति है भोजपुरी में श्रीमद्भगवद् गीता

समीक्षक: डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा श्रीमद् भगवद् गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा...

‘हम मेहररुए नू हईं’: स्त्री की पीड़ा, प्रतिरोध और भीतर छिपल आग के सशक्त स्वर

समीक्षक- राजेश भोजपुरियाचर्चित कवयित्री आ लेखिका डॉ. संध्या सिन्हा के...

भाषाओं की भीड़ में भोजपुरी ही क्यों बाहर? करोड़ों की जुबान के सवाल पर सरकार मौन

भारत की भाषाई विविधता दुनिया में अपनी अलग पहचान...

‘ककहरा’ भोजपुरी काव्य की समकालीन समझ का सार्थक प्रयास

समीक्षक: डॉ० दिनेश प्रसाद सिन्हा भोजपुरी अपनी वाचिक परंपरा, लोकधर्मी...
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